नई दिल्ली:
सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के समय एकमुश्त फंड की व्यवस्था करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने चार नए कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandums) जारी कर पेंशन कम्यूटेशन नियमों पर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने साफ किया है कि पेंशन के 40 प्रतिशत तक हिस्से को अग्रिम लेने की अधिकतम सीमा और 15 साल बाद कटी हुई पेंशन को फिर से पूरी तरह बहाल (रिस्टोर) करने के बुनियादी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, आवेदन की समयसीमा, मेडिकल जांच की अनिवार्यता और विभागीय या अदालती जांच का सामना कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर अहम स्पष्टीकरण जारी किए गए हैं।
केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन कम्यूटेशन) नियमों के तहत कर्मचारी अपनी मूल मासिक पेंशन का अधिकतम 40 फीसदी हिस्सा एकमुश्त अग्रिम राशि के रूप में भुनाने का विकल्प चुन सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मूल पेंशन 50,000 रुपये तय होती है और वह 40 प्रतिशत हिस्सा कम्यूट करता है, तो उसे 20,000 रुपये के आधार पर तय फॉर्मूले से गणना कर एकमुश्त बड़ी रकम दे दी जाती है। इसके बाद उसकी नियमित मासिक पेंशन घटकर 30,000 रुपये रह जाती है। यह कटौती स्थायी नहीं होती, बल्कि नियम 10-A के अंतर्गत जिस तारीख से पेंशन में कटौती शुरू होती है, उसके ठीक 15 वर्ष पूरे होते ही कर्मचारी की मूल पेंशन बिना किसी अतिरिक्त समायोजन के स्वतः 50,000 रुपये के मूल स्तर पर बहाल कर दी जाती है।
मेडिकल जांच के प्रावधानों को लेकर सरकार ने साफ किया है कि सामान्य सेवा शर्तों के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों, किसी सार्वजनिक निगम या कंपनी में समाहित होने वालों अथवा पद समाप्त होने पर पेंशन पाने वालों को बिना किसी मेडिकल परीक्षण के यह एडवांस लेने की छूट मिलती है, बशर्ते वे सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर आवेदन कर दें। इसके विपरीत, नियम 18 के अनुसार यदि कोई कर्मचारी शारीरिक-मानसिक अक्षमता (इनवैलिड पेंशन) के आधार पर रिटायर हुआ हो, जिसे सजा के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई हो, या जिसे अनुकंपा भत्ता मिल रहा हो, तो उसके लिए कम्यूटेशन से पूर्व मेडिकल जांच अनिवार्य होगी। इसके साथ ही, सामान्य रिटायरमेंट के एक वर्ष के बाद आवेदन करने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से मेडिकल बोर्ड की जांच से गुजरना होगा।
विभागीय या न्यायिक जांच (डिपार्टमेंटल या ज्यूडिशियल प्रोसीडिंग्स) का सामना कर रहे कर्मचारियों की स्थिति पर रुख साफ करते हुए सरकार ने कहा है कि नियम 8 के तहत मिलने वाली अनंतिम पेंशन (प्रोविजनल पेंशन) को एडवांस के तौर पर कम्यूट करने की इजाजत नहीं होगी। जब तक संबंधित कर्मचारी के खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम पेंशन स्वीकृत नहीं हो जाती, तब तक वे अग्रिम राशि नहीं ले सकेंगे। जांच समाप्त होने और अंतिम पेंशन स्वीकृत होने के बाद कर्मचारी तुरंत कम्यूटेशन के लिए पात्र हो जाएंगे, और यदि वे पेंशन आदेश जारी होने के एक वर्ष के भीतर आवेदन दाखिल करते हैं, तो उन्हें किसी भी मेडिकल परीक्षण से नहीं गुजरना पड़ेगा।


