नई दिल्ली:
बैंक के एटीएम या कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) में पैसे जमा करते वक्त नोट मशीन के अंदर चले जाना और खाते में रकम का क्रेडिट न होना एक आम तकनीकी समस्या है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग घबराकर मशीन से छेड़छाड़ करने या जबरन नोट बाहर खींचने की कोशिश करने लगते हैं, जिससे मशीन को नुकसान पहुंच सकता है और आपकी परेशानी और बढ़ सकती है। बैंकिंग विशेषज्ञों और नियमों के अनुसार, किसी भी बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन में पैसे अटकने पर घबराने के बजाय तत्काल सही प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत यदि बैंक तय समयसीमा के भीतर फंसी हुई रकम वापस नहीं करता है, तो ग्राहक को प्रतिदिन 1,000 रुपये तक का मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार है।
मशीन में पैसे अटकने की मुख्य वजह तकनीकी खराबी, सर्वर में रुकावट या नोटों का मुड़ा-तुड़ा होना हो सकती है। घटना होते ही सबसे पहले संयम बरतें और मशीन के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती करने से बचें। इसके स्थान पर तुरंत एटीएम स्क्रीन पर दिखने वाली मशीन आईडी, एटीएम की सही लोकेशन, जमा की जा रही सटीक राशि, तारीख और लेन-देन का सही समय किसी सुरक्षित जगह नोट कर लें। यदि मशीन से कोई असफल पर्ची या स्लिप बाहर निकली हो, तो उसे संभाल कर रखें, क्योंकि शिकायत दर्ज कराते समय ये तमाम विवरण प्राथमिक प्रमाण के रूप में काम आते हैं।
घटना के बाद शिकायत करने में बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए। सबसे पहले संबंधित बैंक के अधिकृत कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके घटना की जानकारी दें। इसके अलावा ग्राहक संबंधित बैंक की नजदीकी शाखा में जाकर लिखित आवेदन भी जमा कर सकते हैं। शिकायत चाहे फोन के जरिए दर्ज कराई जाए, नेट बैंकिंग से या सीधे शाखा जाकर, हर स्थिति में कंप्लेंट नंबर या पावती (एक्नॉलेजमेंट रसीद) लेना अनिवार्य है। इसी संदर्भ संख्या के आधार पर भविष्य में मामले की ट्रैकिंग की जाती है।
आरबीआई के नियमों के अनुसार कई मामलों में बैंक 24 घंटे के भीतर खाते में राशि क्रेडिट कर देते हैं, जबकि कुछ मामलों में 5 से 7 कामकाजी दिनों (वर्किंग डेज) का समय लग सकता है। यदि तय समयसीमा पूरी होने के बाद भी बैंक खाते में पैसे वापस नहीं लौटाता है, तो ग्राहक को रोजाना 1,000 रुपये की दर से मुआवजा मिलने का प्रावधान है। यदि बैंक स्तर पर कोई सुनवाई न हो, तो ग्राहक आरबीआई के लोकपाल (Ombudsman) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही ग्राहकों को यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि एटीएम के आसपास दीवार या मशीन पर हाथ से लिखे किसी भी संदिग्ध फोन नंबर पर कॉल न करें, क्योंकि जालसाज फर्जी नंबर चस्पा कर ओटीपी और गोपनीय बैंकिंग जानकारी चुराकर ठगी को अंजाम देते हैं। हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत बोर्ड पर दर्ज नंबरों का ही उपयोग करें।


