रायपुर:
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में नाम गायब होने से परेशान नागरिकों के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन नई प्रारूप मतदाता सूची में किसी कारणवश छूट गया है, वे भी अंतिम मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। आयोग ने साफ किया है कि ऐसा करने पर किसी भी नागरिक के खिलाफ कोई दंडात्मक या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस संबंध में सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
दरअसल, निर्वाचन आयोग के संज्ञान में यह गंभीर विषय आया था कि प्रारूप मतदाता सूची से नाम कटने के बावजूद बड़ी संख्या में पूर्व पंजीकृत मतदाता फॉर्म-6 भरने से कतरा रहे हैं। इसका मुख्य कारण फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा पत्र था। लोगों के मन में यह भारी संशय और डर था कि पूर्व में मतदाता रहने के बाद भी यदि वे पहली बार पंजीकरण की घोषणा पर हस्ताक्षर करते हैं, तो उन पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत गलत या झूठी घोषणा करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
जनता के इस डर और संशय को पूरी तरह समाप्त करते हुए निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप सूची में मौजूद नहीं है, तो अंतिम सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरना ही विधिक प्रक्रिया है। इस परिस्थिति में पूर्व में मतदाता होने के बावजूद फॉर्म-6 भरना किसी भी दृष्टि से गलत, भ्रामक या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा। अपने स्पष्टीकरण को कानूनी आधार देते हुए आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2026 के हालिया फैसले का भी संदर्भ दिया है। याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026 (निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य) की सुनवाई के दौरान अदालत ने भी दो टूक व्यवस्था दी थी कि इस स्थिति में गलत घोषणा की आशंका पूरी तरह निराधार है और प्रभावित आवेदक नियमानुसार फॉर्म-6 दाखिल कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने देश भर के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे केवल इस तकनीकी आधार पर किसी भी आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कोई दंडात्मक कदम न उठाएं कि उसका नाम पुरानी सूची में दर्ज था। हालांकि, आयोग ने यह शर्त स्पष्ट रखी है कि आवेदक का नाम वर्तमान में किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय रूप से दर्ज नहीं होना चाहिए और आवेदन कानूनी नियमों के दायरे में होना अनिवार्य है। इस बीच, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रकाशित प्रारूप सूची में अपना नाम अनिवार्य रूप से जांचें और नाम गायब मिलने पर बिना किसी झिझक या भय के तत्काल फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वाएं।


