भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुर्वेद की पढ़ाई और प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। राजधानी भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद संस्थान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग इन आयुर्वेदा स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित संस्थान की खासियत यह होगी कि यहां प्रशिक्षण लेने के लिए हर बार संस्थान पहुंचना जरूरी नहीं होगा। ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड माध्यम से पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकेंगे।
देश ही नहीं, दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग ऑनलाइन पंजीयन कर इन पाठ्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा करने और निर्धारित मानक पूरा करने के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण
प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य आयुर्वेद की पारंपरिक जानकारी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को अपडेट करना भी होगा। पं. खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. नयन राम के मुताबिक प्रशिक्षण में ऐसी आधुनिक तकनीकों और प्रक्रियाओं को भी शामिल किया जा सकता है, जिनका सामना हर चिकित्सक को नियमित रूप से नहीं होता।
एंडोस्कोपी, कोलपोस्कोपी और क्रायोसर्जरी जैसी तकनीकों के अलावा उपचार के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोग और नवाचार भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इससे डॉक्टरों, मेडिकल ऑफिसर्स और नर्सिंग स्टाफ को समय-समय पर अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करने का अवसर मिलेगा।
योग से पंचकर्म और महिला स्वास्थ्य तक पाठ्यक्रम
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आयुर्वेद से जुड़े कई विषयों को शामिल करने की योजना है। इनमें योग, गर्भावस्था, पंचकर्म, शल्य चिकित्सा, महिला स्वास्थ्य और मर्म चिकित्सा जैसे विषय प्रमुख हो सकते हैं।
संस्थान से जुड़े कॉलेज में मर्म चिकित्सा का केंद्र भी स्थापित किया गया है। इसके अलावा शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, गैर सरकारी संगठनों से जुड़े लोगों और अन्य विशेषज्ञों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के लेक्चर से तैयार होगा डिजिटल कंटेंट
संस्थान की योजना में डिजिटल कंटेंट तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की सुविधा वाला डिजिटल स्टूडियो विकसित करने की तैयारी है।
देशभर के विशेषज्ञों को बुलाकर उनके व्याख्यान रिकॉर्ड किए जा सकेंगे। इन लेक्चर्स को लंबे पाठ्यक्रमों के साथ छोटे वीडियो, रील और पॉडकास्ट के रूप में भी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके लिए सर्वर और पॉडकास्ट स्टूडियो विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित है।
30-40 लोगों के समूह में कराया जा सकेगा ऑनलाइन प्रशिक्षण
प्रस्तावित व्यवस्था में केवल रिकॉर्ड किए गए वीडियो उपलब्ध कराने तक प्रशिक्षण सीमित नहीं रहेगा। किसी विषय पर पूरा पाठ्यक्रम करने वाले करीब 30 से 40 लोगों का समूह बनाकर उन्हें ऑनलाइन विशेषज्ञों से जोड़ा जा सकेगा।
पाठ्यक्रम के दौरान परीक्षा से पहले और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मूल्यांकन की व्यवस्था रखी जा सकती है। निर्धारित मानक पूरा करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
आम लोग और मरीज भी सीख सकेंगे आयुर्वेद की बुनियादी जानकारी
प्रस्तावित संस्थान का दायरा केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। आम लोग और मरीज भी आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी जानकारी के लिए पाठ्यक्रम कर सकेंगे।
आम लोगों के लिए हर पाठ्यक्रम में प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं होगा, हालांकि परीक्षा पास करने पर प्रमाणपत्र देने का विकल्प रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद से जुड़ी प्रमाणिक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना होगा।
देश-विदेश तक पहुंचेगा आयुर्वेद का प्रशिक्षण
प्रस्तावित संस्थान का डिजिटल मॉडल आयुर्वेद प्रशिक्षण को भौगोलिक सीमाओं से बाहर ले जाने में मदद कर सकता है। ऑनलाइन पंजीयन के बाद प्रशिक्षणार्थी अपने स्थान से ही सर्वर के माध्यम से पाठ्यक्रम की सामग्री तक पहुंच सकेंगे।
इस पहल से डॉक्टरों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, इंटर्न, शोधार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए लगातार ज्ञानवर्धन का नया माध्यम तैयार हो सकता है। वहीं आम लोगों को भी आयुर्वेद के सिद्धांतों और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी जानकारी सीखने का अवसर मिलेगा।























