नई दिल्ली:
दिवाली और त्योहारी सीजन के दौरान एयरलाइंस कंपनियों द्वारा हवाई किराए में की जा रही भारी बढ़ोतरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यात्रियों को सोमवार को बड़ा झटका लगा। सर्वोच्च अदालत ने हवाई किराए की अत्यधिक वृद्धि और मनमाने फेयर के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। मामले की त्वरित सुनवाई की मांग खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख और दो-टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किराया बहुत ज्यादा है, तो हवाई यात्रा मत कीजिए।
यह याचिका जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश सिंह की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए रखी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अभिनव ने दलील दी कि त्योहारी सीजन में सामान्य दरों की तुलना में हवाई किराए में 700 प्रतिशत तक का बेतहाशा इजाफा कर दिया गया है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि हवाई यात्रा अब एक आवश्यक सेवा बन चुकी है और इस तरह की अनियंत्रित मूल्य वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। हालांकि पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और मामले को जल्दबाजी में सुनने से मना कर दिया।
16 नवंबर को होगी मुख्य जनहित याचिका पर सुनवाई
यह मामला याचिकाकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा एयरलाइंस कंपनियों की एल्गोरिदम-आधारित ‘डायनामिक प्राइसिंग’ और अन्य छिपे हुए शुल्कों के खिलाफ दायर मूल जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट इस मुख्य याचिका पर सुनवाई के लिए पहले ही 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित कर चुका है। इसी बीच 30 अक्टूबर 2026 को एक अंतरिम अर्जी दाखिल कर त्योहारी सीजन के दौरान हवाई किरायों की अधिकतम सीमा (कैपिंग) तय करने तथा इकोनॉमी क्लास के यात्रियों को 25 किलोग्राम तक बैगेज ले जाने की छूट देने के लिए तत्काल दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
दिल्ली-कोलकाता रूट पर किराया ₹78,000 के पार
अदालत के समक्ष पेश की गई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि त्योहारी मांग के चलते देश के प्रमुख घरेलू मार्गों पर हवाई टिकटों के दाम 2 से 7 गुना तक उछल चुके हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली से कोलकाता मार्ग पर जिस टिकट की सामान्य कीमत 10,000 से 11,000 रुपये होती है, वह आगामी 6 नवंबर के लिए 78,694 रुपये तक पहुंच गई है।
केंद्र सरकार ने अधिसूचित किए भारतीय वायुयान नियम, 2026
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 1 नवंबर को ही नए ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026′ अधिसूचित किए हैं, जो आगामी 1 जनवरी 2027 से पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे। इन नियमों के नियम 192 के तहत एयरलाइंस कंपनियों के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे परिचालन लागत के आधार पर ही तर्कसंगत किराया निर्धारित करें और इसका पूरा ब्योरा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही अप्रत्याशित परिस्थितियों या जनहित में सरकार को एयरलाइंस कंपनियों के मूल्य निर्धारण में सीधा हस्तक्षेप करने का अधिकार भी दिया गया है। फिलहाल अदालत के सख्त रुख के बाद त्योहारों पर घर जाने वाले आम हवाई यात्रियों को टिकटों की ऊंची कीमतों से तत्काल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।


