नई दिल्ली:
त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों और किराए पर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने एविएशन सेक्टर के लिए नए नियमों की रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026′ (Bharatiya Vayuyan Niyam, 2026) को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। मंत्रालय द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित इन नियमों को 31 अक्टूबर को भारत के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया गया। ये नए नियम आगामी 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी होंगे। सरकार ने साफ किया है कि सामान्य बाजार परिस्थितियों में एयरलाइन कंपनियों को अपना किराया तय करने की व्यावसायिक स्वतंत्रता रहेगी, हालांकि किसी असाधारण स्थिति में जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास लिखित निर्देश जारी कर हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा।
नए नियमों के ‘नियम 192’ (Rule 192) में हवाई टिकटों के किराए से जुड़े विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। इसके अंतर्गत एयरलाइंस अपनी परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) और विमान संचालन खर्चों को ध्यान में रखते हुए खुद बेस फेयर तय कर सकेंगी। सरकार ने टिकटों के लिए कोई तय अधिकतम सीमा (अपर कैपिंग) निर्धारित नहीं की है। वहीं, नियम 192(6) के अनुसार यदि देश में कोई असाधारण या आपात स्थिति पैदा होती है और जनहित में कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है, तो केंद्र सरकार एयरलाइंस को किराए के संबंध में सीधे लिखित निर्देश जारी कर सकेगी। सरकार के ऐसे आदेश स्थिति के अनुकूल, तर्कसंगत और केवल निर्धारित समयावधि तक ही प्रभावी रहेंगे।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी नए विमानन नियमों में यात्रियों के अधिकारों, सुरक्षा मानकों और परिचालन को लेकर 10 प्रमुख प्रावधान तय किए गए हैं:
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विमान का रजिस्ट्रेशन: नए नियमों में देश के भीतर विमानों के पंजीकरण और उनके कानूनी स्वामित्व से जुड़ी प्रक्रियाओं के स्पष्ट प्रावधान हैं।
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विमान की सुरक्षा और फिटनेस: सभी विमानों को उड़ान के योग्य बनाए रखने के लिए अनिवार्य एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेशन (Airworthiness Certification) की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
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विमान निर्माण और डिजाइन: विमानों के डिजाइन, तकनीकी बदलावों, निर्माण मानकों, मरम्मत और पार्ट्स में बदलाव के लिए सख्त वैश्विक नियमों का पालन करना होगा।
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नियमित जांच और रखरखाव: विमानों की समय-समय पर तकनीकी जांच और मेंटेनेंस अनिवार्य होगी, ताकि उड़ान सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
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पायलट और विमानन कर्मियों के लाइसेंस: पायलट, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) और अन्य तकनीकी विमानन कर्मियों की शैक्षणिक योग्यता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को कड़ा किया गया है।
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उड़ान संचालन और काम के घंटे: पायलटों और केबिन क्रू के लिए उड़ान और ड्यूटी के घंटे कड़ाई से तय किए गए हैं, ताकि अत्यधिक थकान के कारण उड़ानों की सुरक्षा प्रभावित न हो।
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किराए में पूर्ण पारदर्शिता: एयरलाइंस को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किराए का पूरा ब्योरा देना होगा, जिसमें बेस फेयर, टैक्स और अन्य सभी शुल्कों को अलग-अलग स्पष्ट दिखाना अनिवार्य होगा।
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कैंसिलेशन और रिफंड की स्पष्ट शर्तें: टिकट बुकिंग के दौरान ही यात्रियों को टिकट रद्द करने के शुल्क (Cancellation Charges) और रिफंड की सभी शर्तें पारदर्शी तरीके से बतानी होंगी।
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DGCA द्वारा किराए की निगरानी: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) एयरलाइंस के टैरिफ और मूल्य निर्धारण की नियमित निगरानी करेगा। साथ ही असाधारण परिस्थितियों में सरकार जनहित में किराए को लेकर लिखित आदेश जारी कर सकेगी।
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हवाई अड्डा संचालन के मानक: देश के सभी एयरपोर्ट्स के सुरक्षित संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।


