राजनांदगांव:
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के एक छोटे से गांव खैरा ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में पूरे देश में इतिहास रच दिया है। ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत गांव के सभी 141 घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कर दिए गए हैं। इसके साथ ही खैरा देश का ऐसा पहला गांव बन गया है, जिसके 100 प्रतिशत घर पूरी तरह सौर ऊर्जा से आच्छादित हो चुके हैं। अब इस गांव के हर घर की छत खुद बिजली पैदा कर रही है, जिससे ग्रामीणों को हर महीने आने वाले भारी बिजली बिलों से हमेशा के लिए निजात मिल गई है।
889 की आबादी वाले इस गांव के प्रत्येक घर में 2 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाया गया है, जिससे पूरे गांव की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 282 किलोवाट तक पहुंच गई है। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह रही कि ग्रामीणों को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलने वाली प्रत्यक्ष सब्सिडी के बाद शेष बची लागत की भरपाई कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के माध्यम से की गई, जिससे गरीब से गरीब परिवार भी बिना किसी आर्थिक दबाव के इस योजना से जुड़ सका।
खैरा की यह सफलता इसलिए भी अनुकरणीय है क्योंकि इसका लाभ केवल संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रहा। गांव के कुल 141 सोलर-युक्त घरों में से 93 घर ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत बने गरीब परिवारों के हैं। गांव में निवासरत अनुसूचित जनजाति (ST) के 21 परिवारों के 88 सदस्य और अनुसूचित जाति (SC) के 4 परिवारों के 18 सदस्यों के घरों को भी योजना से सीधे जोड़ा गया है। पेंशन पर जीवनयापन करने वाली विधवा शोहगिल गोंड, सीमित मजदूरी करने वाले कार्तिक यादव और बुजुर्ग सहदेव साहू जैसे ग्रामीणों ने बताया कि सीमित आमदनी में बिजली बिल भरना उनके लिए बड़ा संकट था, लेकिन सोलर पैनल लगने से अब उन्हें जीवनभर के लिए बड़ी आर्थिक राहत मिल गई है। नेट मीटरिंग व्यवस्था के कारण आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली सीधे पावर ग्रिड में जा रही है, जिससे ग्रामीण अब मात्र उपभोक्ता न रहकर ‘ऊर्जादाता’ बन चुके हैं।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को धरातल पर उतारने में स्थानीय महिलाओं और पद्मश्री फुलबासन बाई यादव के स्व-सहायता समूह नेटवर्क की भूमिका निर्णायक रही। ‘पीएम सूर्य सखी’ संगीता साहू और उनकी टीम ने घर-घर जाकर शुरुआत में हिचकिचा रहे ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान किया और आवेदन से लेकर तकनीकी कागजी कार्रवाई तक में मदद की। ग्रामीणों को बैंक शाखाओं के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए गांव में नियमित ‘पीएम सूर्य सभाएं’ आयोजित की गईं और बैंक अधिकारियों ने गांव में ही विशेष कैंप लगाकर लोन व वित्तीय औपचारिकताएं पूरी कराईं। ग्राम पंचायत सरपंच भूपेंद्र यादव, जिला प्रशासन और सीएसआर भागीदारों के इस संयुक्त मॉडल ने खैरा को देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक आदर्श और प्रेरणादायी उदाहरण बना दिया है।


