छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू, मांगा गया विस्तृत डेटा
रायपुर,
छत्तीसगढ़ में विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आयोजन को लेकर आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की चर्चा के बावजूद आदेश जारी नहीं होने पर छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच ने सरकार और विभाग से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। मंच ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मांग पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय संयोजक एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने विभागीय स्तर पर हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़े गंभीर विषय पर केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। विभाग को विभागीय टीईटी के आयोजन को लेकर स्पष्ट आदेश जारी कर शिक्षकों के बीच बनी अनिश्चितता दूर करनी चाहिए।
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तीन दौर की विभागीय चर्चा के बाद भी आदेश का इंतजार -रविन्द्र राठौर
रविन्द्र राठौर के अनुसार, शिक्षक साझा मंच की मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ दो दौर की वार्ता हो चुकी है। इसके अतिरिक्त स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी तीन दौर की चर्चा हुई है। इन बैठकों में विभागीय परीक्षा आयोजित करने को लेकर आश्वासन मिलने और वर्ष में तीन बार विभागीय टीईटी आयोजित करने का प्रस्ताव सामने आने का दावा किया गया है।
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इसके बावजूद अब तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राठौर ने कहा कि यदि शिक्षकों को केवल आश्वासनों के सहारे उलझाकर समय बिताया जा रहा है, तो शिक्षक संवर्ग इसे स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने विभाग से मांग की कि परीक्षा आयोजन की प्रक्रिया, पात्रता की शर्तों और समयसीमा को लेकर तत्काल लिखित आदेश जारी किया जाए, ताकि शिक्षकों को अपने भविष्य के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
सेवा सुरक्षा और टीईटी से मुक्ति का सवाल उठा रहे शिक्षक -प्रदीप पाण्डेय
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि विभागीय टीईटी का मुद्दा विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी नियुक्ति पूर्ववर्ती नियमों के तहत हुई थी और जो वर्तमान टीईटी संबंधी प्रावधानों के कारण अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक संवर्ग को टीईटी से राहत देने की मांग पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षकों की वर्षों की सेवा और उनके भविष्य से जुड़े विषय पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान बैठकों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लागू होने वाले प्रावधानों तथा राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के संबंध में स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए। विभागीय टीईटी को लेकर दिशा-निर्देश जारी होने से शिक्षकों को आगे की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
आदेश नहीं आया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी – विकास राजपूत
शिक्षक साझा मंच के संचालक विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति जैसे महत्वपूर्ण सवालों की लगातार अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि विभाग शीघ्र निर्णय लेकर आदेश जारी नहीं करता है, तो मंच प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।
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उन्होंने कहा कि परीक्षा की घोषणा के साथ पात्रता संबंधी शर्तें, आवेदन प्रक्रिया, संभावित समय-सारणी और अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश भी स्पष्ट किए जाने चाहिए। इससे शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त होगी और आगे की तैयारी का रास्ता साफ होगा।
जाकेश साहू और लैलून भारद्वाज ने दिया शिक्षक एकता पर जोर
शिक्षक साझा मंच से जुड़े जाकेश साहू और लैलून भारद्वाज ने शिक्षक हितों के लिए सभी संगठनों को एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सेवा सुरक्षा और पूर्व सेवा की गणना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी पहल के लिए शिक्षक संगठनों के बीच एकता जरूरी है।
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उन्होंने संकेत दिया कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा सकता है। मंच जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक आयोजित कर सकता है, जिसमें सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने और साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
पूर्व सेवा गणना और पदोन्नति के मुद्दे भी रहेंगे प्रमुख
शिक्षक साझा मंच का कहना है कि शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग देखने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण से समाधान किया जाना चाहिए। विभागीय टीईटी के साथ पूर्व सेवा की गणना, सेवा सुरक्षा और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति जैसे विषय भी शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मंच का मानना है कि इन मांगों पर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय से शिक्षकों के बीच व्याप्त असंतोष को दूर किया जा सकता है। इसके लिए सभी शिक्षक संगठनों को साझा प्रयास करने की आवश्यकता है।
सरकार से समयबद्ध निर्णय की मांग
शिक्षक साझा मंच के प्रमुख पदाधिकारियों रविन्द्र राठौर, विकास सिंह राजपूत, प्रदीप पाण्डेय, लैलून भारद्वाज, जाकेश साहू और चेतन बघेल ने विभागीय टीईटी के संबंध में शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मंच का कहना है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े विषय को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं है। सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को वार्ताओं में बनी सहमति के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए आगामी कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए।
फिलहाल विभागीय टीईटी के आयोजन को लेकर शिक्षकों की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि सरकार और विभाग आश्वासनों को औपचारिक आदेश में बदलते हैं या शिक्षकों को अपनी मांगों के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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