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अम्बिकापुर:
अविभाजित सरगुजा जिले के राजीव गांधी शिक्षा मिशन में मिडिल स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदी के नाम पर हुए बहुचर्चित घोटाले में ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों ने 10 आरोपियों के खिलाफ अम्बिकापुर की विशेष अदालत में 20 हजार पन्नों का भारी-भरकम आरोप पत्र (चालान) पेश कर दिया है। जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना आपूर्ति और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कर शासन को कुल ₹67,48,008 (लगभग 67.48 लाख रुपये) की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) और भादंवि की धारा 120-बी, 409 एवं 420 के तहत चालान पेश किया गया है।
यह पूरा मामला वर्ष 2010-11 का है, जब सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए ₹2.70 करोड़ का आवंटन मिला था। तत्कालीन जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश जारी किए गए थे और कुल ₹2,68,18,838 के चेक 28 मार्च 2011 को जारी हुए थे। क्रय आदेशों में 20 दिनों के भीतर आपूर्ति की शर्त थी और कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद ही चेक देने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक (DPC) सत्यप्रकाश पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर फर्नीचर की आपूर्ति और सत्यापन से पहले ही 6 से 9 अप्रैल 2011 के बीच फर्मों को वितरित कर दिए।
विवेचना में खुलासा हुआ कि भण्डार क्रय नियमों की अनदेखी करते हुए आठ फर्मों ने निर्धारित मात्रा से काफी कम फर्नीचर दिया, जबकि दो फर्मों ने पूरा भुगतान लेने के बावजूद किसी भी स्कूल में एक भी फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। फर्मों ने देयकों के साथ स्कूलवार आपूर्ति की सूची और प्रधान पाठकों की हस्ताक्षरयुक्त पावतियां तक जमा नहीं की थीं। इसके अलावा गुणवत्ता की जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन, फर्मों से अनुबंध और तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि जमा कराने जैसे बुनियादी नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया था। वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बजट व्यपगत होने से बचाने के नाम पर अग्रिम आहरण और बिना सत्यापन के भुगतान करना गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
घोटाले में फर्जी फर्म बनाकर शासकीय राशि हड़पने का बड़ा खेल भी सामने आया है। तत्कालीन डीपीसी सत्यप्रकाश पाण्डेय ने दर्शन फेब्रिकेटर रायपुर के नाम जारी क्रय आदेश उन्हें देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को थमा दिया। पाण्डेय के कहने पर संजय पटेल ने ‘दर्शन फेब्रिकेशन’ नाम से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में खाता खोला और ₹22,91,909 का चेक जमा कर राशि आहरित कर ली। पूछताछ में पटेल ने कबूल किया कि उसने ₹7 लाख कमीशन के रूप में सत्यप्रकाश पाण्डेय को दिए थे, लेकिन इसके बाद भी किसी स्कूल में फर्नीचर नहीं भेजा गया। इसी तरह महारानी स्टील एण्ड अप्लायंस के संचालक प्रेमचन्द जैन (जिनकी मृत्यु अगस्त 2025 में हो चुकी है) ने ₹11,44,349 का आहरण किया, लेकिन कोई आपूर्ति नहीं की। अनुपलब्ध फर्नीचर, वैट और निरीक्षण शुल्क को मिलाकर कुल ₹67.48 लाख से अधिक का गबन प्रमाणित हुआ है।
चालान में तत्कालीन डीपीसी सत्यप्रकाश पाण्डेय और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल के अलावा आठ अन्य फर्म संचालकों को आरोपी बनाया गया है। इनमें अजय कुमार अग्रवाल (अम्बिका अलमीरा एण्ड स्टील फेब्रिकेटर्स), ममता अग्रवाल (सेलेनो स्टील), बिधी सिंह कटलारिया (महामाया फेब्रिकेटर्स), राजकुमार बंसल (सूर्या स्टील एण्ड वुडन इंडस्ट्रीज), संदीप तिवारी (श्री साई इंडस्ट्रीज), हितेश कुमार अग्रवाल (श्याम मेटल प्रोडक्ट्स), रितेश कुमार अग्रवाल (श्री श्याम इंडस्ट्रीज) और संजीव गुप्ता (पंकज फर्नीचर मार्ट) शामिल हैं। मुख्य आरोपी सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल द्वारा विवेचना में सहयोग न करने पर उन्हें 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। अब प्रधान पाठकों के बयानों, बैंक लेनदेन और जब्ती दस्तावेजों के साथ अदालत में चालान पेश कर दिया गया है।























