रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अवैध रूप से सिम कार्ड एक्टिवेट करने के बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है। दूरसंचार विभाग (DoT) के मध्य प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (LSA) ने साइबर अपराध की जांच में पाया कि राज्य के एक प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट ने लोगों की जानकारी और सहमति के बिना उनके आईडी प्रूफ का उपयोग कर 25 मोबाइल कनेक्शन फर्जी तरीके से चालू कर दिए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग और टेलीकॉम कंपनियों ने आरोपी एजेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है और उसके भविष्य में सिम जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जांच, संदिग्ध नंबर निष्क्रिय
दूरसंचार विभाग ने इन 25 मोबाइल नंबरों की जांच अपने ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से की। जांच में संदिग्ध पाए गए नंबरों का जब पुनः सत्यापन (Re-verification) कराया गया और वे नियमों पर खरे नहीं उतरे, तो विभाग ने उन सभी अवैध नंबरों को तुरंत बंद (Deactivate) कर दिया।
दूरसंचार अधिनियम 2023: 3 साल की कैद और ₹50 लाख तक जुर्माना
दूरसंचार विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि फर्जी तरीके से सिम जारी करना, दूरसंचार पहचान का दुरुपयोग करना या मोबाइल के आईएमईआई (IMEI) नंबर से छेड़छाड़ करना दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत गैर-जमानती और गंभीर दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक की जेल की सजा और अधिकतम ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नागरिकों के लिए DoT की जरूरी हिदायतें
साइबर ठगी और कानूनी पचड़ों से बचने के लिए विभाग ने लोगों को इन लापरवाहियों से बचने की सलाह दी है:
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सिम साझा न करें: अपने नाम पर लिया गया सिम कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को न सौंपें, न बेचें और न ही किराए पर दें। यदि उस नंबर से कोई गैरकानूनी गतिविधि होती है, तो पहली कानूनी जवाबदेही मूल ग्राहक की तय होगी।
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IMEI से छेड़छाड़ गैरकानूनी: ऐसे मॉडेम, सिम बॉक्स या गैजेट्स का उपयोग या खरीद-फरोख्त पूरी तरह प्रतिबंधित है, जिनके IMEI नंबर में हेरफेर या क्लोनिंग की जा सकती है।
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पहचान बदलने वाले ऐप्स: कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (CLI) या दूरसंचार पहचान को छिपाने/बदलने वाले मोबाइल ऐप्स या वेबसाइटों के इस्तेमाल से बचें।
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फर्जी दस्तावेजों पर रोक: किसी भी फर्जी या जाली दस्तावेज से सिम प्राप्त करना कानूनी रूप से भारी पड़ सकता है।
‘संचार साथी’ पोर्टल से खुद चेक करें अपनी आईडी पर चल रहे सिम
नागरिकों की साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार ने संचार साथी पोर्टल (www.sancharsaathi.gov.in) और मोबाइल ऐप का उपयोग करने की अपील की है।
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कनेक्शन जांचें: इस पोर्टल के जरिए कोई भी उपभोक्ता यह जान सकता है कि उसके नाम पर कुल कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। यदि कोई ऐसा नंबर दिखता है जो उसने नहीं लिया है, तो उसे तुरंत वहीं से रिपोर्ट कर ब्लॉक कराया जा सकता है।
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मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता: पोर्टल पर फोन का IMEI नंबर डालकर उसकी असलियत, सही मॉडल, ब्रांड और निर्माता की पुष्टि की जा सकती है।























