एकता नगर (गुजरात): भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ के 72 वर्षों के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार यह भव्य समारोह देश की राजधानी नई दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित किया जा रहा है। विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की छांव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत करेंगी।
1954 में ‘स्टेट अवॉर्ड’ के रूप में हुई थी शुरुआत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की नींव वर्ष 1949 में गठित ‘फिल्म जांच समिति’ की सिफारिशों पर रखी गई थी। समिति ने भारतीय सिनेमा के सामाजिक, सांस्कृतिक प्रभाव और गुणवत्ता के मूल्यांकन के बाद सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन की वकालत की थी। इसके बाद 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और सूचना एवं प्रसारण मंत्री बी.वी. केसकर की मौजूदगी में पहले समारोह का आयोजन हुआ। उस समय इसे ‘स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म’ कहा जाता था और इसका मुख्य फोकस फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों तक सीमित था।

पहली विजेता बनी थी मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ पहले राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में 1953 की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को सम्मानित किया गया था:
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सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म: मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ ने पहला स्वर्ण पदक (प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल) जीतकर इतिहास रचा था।
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डॉक्यूमेंट्री: ‘महाबलीपुरम’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का खिताब मिला।
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मेरिट सर्टिफिकेट: विमल रॉय की मशहूर हिंदी फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ और बांग्ला फिल्म ‘भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य’ को ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से नवाजा गया, जबकि बच्चों की फिल्म ‘खेला घर’ को बाल फिल्म श्रेणी में योग्यता प्रमाणपत्र मिला।
शुरुआत में नहीं मिलते थे बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस अवॉर्ड शुरुआती 14 वर्षों तक व्यक्तिगत अभिनय के लिए कोई पुरस्कार नहीं दिया जाता था। 1967 की फिल्मों के लिए वर्ष 1968 में पहली बार अभिनय श्रेणियों की शुरुआत की गई:
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बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार पहले ‘बेस्ट एक्टर’ बने, जिन्हें ‘एंटोनी फिरंगी’ और ‘चिड़ियाखाना’ के लिए सम्मानित किया गया। उस समय इस सम्मान को ‘भारत अवॉर्ड’ कहा जाता था।
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दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त को फिल्म ‘रात और दिन’ के लिए पहली ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ चुना गया, जिसे तब ‘उर्वशी अवॉर्ड’ के नाम से जाना जाता था। बाद में इन श्रेणियों का नाम बदलकर बेस्ट एक्टर और एक्ट्रेस किया गया।
72 वर्षों के सफर में आए ऐतिहासिक बदलाव
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1969 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार: सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान की शुरुआत हुई, जिसकी पहली विजेता अभिनेत्री देविका रानी बनीं।
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प्रशासनिक बदलाव: 1973 से डायरेक्ट्रेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल (DFF) ने इसका जिम्मा संभाला, जिसका वर्ष 2022 में राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) में विलय कर दिया गया।
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श्रेणियों का पुनर्गठन: 70वें संस्करण से श्रेणियों को नया रूप दिया गया। ‘इंदिरा गांधी अवॉर्ड’ का नाम बदलकर ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ किया गया और राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सरोकार व पर्यावरण को मिलाकर संयुक्त श्रेणी बनाई गई। साथ ही AVGC (एनिमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स) को भी शामिल किया गया।
सत्यजीत रे के नाम 36 अवॉर्ड्स, शबाना आजमी और ममूटी शीर्ष पर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के इतिहास में सबसे बड़ा रिकॉर्ड महान फिल्मकार सत्यजीत रे के नाम दर्ज है, जिन्होंने 6 बेस्ट डायरेक्टर और 30 बेस्ट फीचर फिल्म श्रेणियों सहित कुल 36 नेशनल अवॉर्ड जीते।
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अभिनय में रिकॉर्ड: शबाना आजमी ने सर्वाधिक 5 बार बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है।
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बेस्ट एक्टर: 4-4 पुरस्कारों के साथ अमिताभ बच्चन और ममूटी संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं।
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संगीत जगत: महान गायक के. जे. येसुदास ने सर्वाधिक 8 बार बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर और संगीतकार ए. आर. रहमान ने कुल 7 राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए हैं।























