बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। वर्ष 2025 में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में 50 प्रतिशत के निर्धारित अनुपात का पालन न करने और ई-कैडर (E-Cadre) के पात्र शिक्षकों को पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर रखे जाने के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। इसके साथ ही अदालत ने पूर्व में याचिकाकर्ताओं को दी गई अंतरिम राहत को अगली सुनवाई तक बरकरार रखने का आदेश दिया है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने पूछा- केवल LB कैडर को ही क्यों शामिल किया गया?
ब्रजेश मिश्रा सहित कई शिक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने राज्य के अधिवक्ता को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह शासन से आवश्यक निर्देश लेकर स्थिति स्पष्ट करें। अदालत ने विशेष रूप से पूछा कि 2025 की डीपीसी में 50-50 प्रतिशत के निर्धारित अनुपात का पालन क्यों नहीं किया गया और केवल शिक्षक (एलबी कैडर) के मामलों पर ही विचार क्यों हुआ, जबकि ई-कैडर के शिक्षक भी 1 जनवरी 2025 की स्थिति में पदोन्नति के लिए पूरी तरह पात्र थे।
नियमों की अनदेखी के खिलाफ लामबंद हुए ई-कैडर के शिक्षक
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि पदोन्नति के लिए तय मानकों के विपरीत ई-कैडर के पात्र सदस्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। सुनवाई में राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाई.एस. ठाकुर उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न हस्तक्षेपकर्ताओं और पक्षकारों की ओर से भी अधिवक्ताओं ने पैरवी की।
अगली सुनवाई तक अंतरिम राहत बरकरार, 3 मामले समूह से अलग
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आगामी सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इन याचिकाओं को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि शिक्षकों को पूर्व में दी गई अंतरिम राहत अगली तिथि तक प्रभावी रहेगी। वहीं सुनवाई के दौरान तीन मामलों को मुख्य याचिकाओं के समूह से अलग कर दिया गया, क्योंकि उनके विधिक बिंदु भिन्न थे और शासन ने उन पर पूर्व फैसलों के आदेश प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। इन तीन मामलों की सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।























