अब कागजों पर नहीं, ऑनलाइन मंजूर होगी छुट्टी: e-HRMS पोर्टल से आवेदन अनिवार्य, आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
रायपुर:
जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर केंद्र और राज्य शासन ने नियमों में बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 में किए गए नवीनतम संशोधन (संशोधन अधिनियम, 2026) के बाद अब घटना के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर पंजीयन कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का औपचारिक आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।
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आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार राज्यभर में इन संशोधित प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को नए प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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समय-सीमा के अनुसार पंजीयन के नए नियम
संशोधित प्रावधानों के तहत विलंब की अवधि के आधार पर अनुमति प्राधिकारियों का दायरा तय किया गया है:
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1 से 2 वर्ष के भीतर देरी पर: जन्म अथवा मृत्यु की घटना के एक वर्ष बाद किंतु दो वर्ष की अवधि के भीतर सूचना मिलने पर पंजीयन के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) का आदेश अनिवार्य होगा।
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2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर: यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, तो सामान्य प्रशासनिक आदेश से पंजीयन नहीं होगा। इसके लिए आवेदक को सक्षम न्यायालय से प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का वैधानिक आदेश प्राप्त करना होगा।
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रजिस्ट्रार द्वारा अमल: संबंधित घटना जिस क्षेत्र (नगरीय निकाय अथवा ग्राम पंचायत) में हुई है, वहां के स्थानीय जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश और आवश्यक जांच के आधार पर ही रिकॉर्ड दर्ज कर प्रमाण पत्र जारी करेंगे।
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अधिनियम की धारा 13 में संशोधन
भारत सरकार ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बड़ा विधायी संशोधन किया है। इसके तहत पूर्व की उपधारा (3) के स्थान पर नई उपधारा (3) तथा नई उपधारा (3ए) को प्रतिस्थापित किया गया है।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य देर से दर्ज होने वाले जन्म और मृत्यु के मामलों में फर्जीवाड़े और त्रुटियों पर पूरी तरह अंकुश लगाना, पारदर्शी प्रक्रिया तय करना तथा पूरी पंजीयन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और विधिसम्मत बनाना है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की कानूनी व प्रशासनिक जटिलताओं से बचने के लिए परिवार में जन्म अथवा मृत्यु की घटना का निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही अनिवार्य रूप से पंजीयन कराएं।


