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नई दिल्ली:
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिकूल मौसम और बढ़ती परिवहन लागत के कारण इस त्योहारी सीजन में सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) के बाजार में भारी तेजी देखने को मिल रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार ड्राई फ्रूट्स के दाम औसतन 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। कीमतों में आए इस रिकॉर्ड उछाल का सीधा असर दिवाली पर दिए जाने वाले कॉरपोरेट और निजी उपहारों पर पड़ रहा है। बजट सीमित होने के कारण कंपनियां अब महंगे मेवों की जगह सस्ते विकल्पों और हेल्दी बीजों (सीड्स) को गिफ्ट हैंपर्स में शामिल कर रही हैं।
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क्यों आसमान छू रहे हैं ड्राई फ्रूट्स के भाव?
कारोबारियों और नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल (इंडिया) के अनुसार, कीमतों में अप्रत्याशित तेजी के पीछे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं: ईरान और मध्य पूर्व में तनाव के चलते खजूर की आवक प्रभावित हुई है। वहीं, अफगानिस्तान से होने वाली सप्लाई में भी रुकावट आई है। भारत में सबसे ज्यादा बादाम अमेरिका से आयात होता है, जहां इस बार उत्पादन कम हुआ है। साथ ही, शिपिंग कंपनियां भारत के मुकाबले ज्यादा मालभाड़ा देने वाले चीन को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे भारतीय शिपमेंट में देरी हो रही है। वैश्विक समुद्री मार्गों पर तनाव के चलते जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे शिपिंग लागत लगभग दोगुनी हो गई है और रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है।
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बाजार का ताजा रेट कार्ड: पिस्ता और खजूर सबसे ज्यादा महंगे
थोक बाजार में इस बार सबसे बड़ा उछाल पिस्ता, बादाम और खजूर की कीमतों में देखा जा रहा है:
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पिस्ता: ₹900 से बढ़कर सीधे ₹1,800 प्रति किलो (कीमत दोगुनी हुई)।
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खजूर: ₹250 से उछलकर ₹500 प्रति किलो पहुंचा।
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बादाम: ₹800 से बढ़कर ₹1,100 प्रति किलो हुआ।
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काजू: ₹900 से ₹1,200 प्रति किलो (पिछले साल ₹850 से ₹1,000 प्रति किलो था)।
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अखरोट (₹1,100 से ₹1,400 प्रति किलो) और अंजीर (₹600 से ₹1,200 प्रति किलो) के दाम पिछले साल के आसपास ही स्थिर हैं।
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कंपनियों ने बदली गिफ्ट पॉलिसी: हल्की हुई टोकरी, बीजों की मांग 30% बढ़ी
ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में उछाल के चलते कॉरपोरेट जगत ने अपने दिवाली गिफ्ट बजट को संतुलित करने के लिए रणनीति बदली है:
कंपनियां अब पिस्ता और बादाम के बजाय कद्दू के बीज (पंपकिन सीड्स), तरबूज के बीज (वॉटरमेलन सीड्स), सूरजमुखी के बीज (सनफ्लावर सीड्स) और चिया सीड्स को गिफ्ट हैंपर में तरजीह दे रही हैं। पिछले साल की तुलना में बीजों की मांग में 30% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई मेवा मसाला मर्चेंट एसोसिएशन के अनुसार, कंपनियां निर्धारित बजट में रहने के लिए हैंपर का कुल वजन कम करा रही हैं और महंगे मेवों की मात्रा घटाकर काजू, अखरोट व अंजीर जैसे अपेक्षाकृत स्थिर दाम वाले मेवों को शामिल कर रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में तेजी के बावजूद त्योहारी उत्साह और मांग में कोई कमी नहीं है। कंपनियों से ऑर्डर और पूछताछ लगातार जारी है, हालांकि हैंपर का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल गया है।
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