रांची। सड़कों पर सफर अब भी जानलेवा साबित हो रहा है। साल 2026 के शुरुआती महीनों में सामने आए जिला-वार आंकड़े सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। कुछ जिलों में हादसों की संख्या 200 के पार पहुंच गयी, जबकि कई जगह दुर्घटनाओं की तुलना में मौतों का आंकड़ा बेहद ज्यादा रहा।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सभी जिलों के लिए एक ही अवधि का ताजा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग जिलों से अलग-अलग समय के आंकड़े सामने आए हैं। ऐसे में उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तस्वीर को समझना जरूरी है।
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आठ महीने में 239 हादसे, 172 लोगों की मौत
पलामू में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 239 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गयीं। इन हादसों में 172 लोगों की मौत हुई। अगस्त में ही 20 दुर्घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गयी।लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं को लेकर जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में भी चिंता जाहिर की गयी है।
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गुमला में हादसे कम, लेकिन मौतों का आंकड़ा डराने वाला
गुमला में जनवरी से अगस्त तक 167 सड़क हादसे हुए। इनमें 157 लोगों की मौत दर्ज की गयी। यानी दुर्घटनाओं की संख्या के मुकाबले मृतकों का आंकड़ा बेहद गंभीर है।
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पाकुड़ में 52 हादसे, 48 मौतें
पाकुड़ में जनवरी से सितंबर तक 52 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें 48 लोगों की मौत हुई। सितंबर महीने में तीन हादसों में दो लोगों की जान गयी।
आंकड़े बताते हैं कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता केवल हादसों की संख्या से नहीं, बल्कि उनमें होने वाली मौतों से भी समझी जा सकती है।
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एक महीने में 20 हादसे और 13 मौतें
सरायकेला-खरसावां में एक महीने के दौरान 20 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 13 लोगों की मौत हो गयी। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की समीक्षा की गयी।
जिले में 18 ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए गए हैं, जहां दुर्घटनाओं का खतरा अधिक माना जा रहा है।
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छह महीने में राजधानी वाले जिले में सबसे ज्यादा हादसे
जनवरी से जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी वाले जिले में सबसे ज्यादा 408 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें 286 लोगों की मौत हुई।
इसके बाद धनबाद में 208 हादसे और 118 मौतें, हजारीबाग में 195 हादसे और 163 मौतें तथा गिरिडीह में 194 हादसे और 180 मौतें दर्ज की गयीं।
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जनवरी-जून के आंकड़ों में किस जिले की क्या स्थिति?
| जिला | सड़क हादसे | मौतें |
|---|---|---|
| राजधानी वाला जिला | 408 | 286 |
| धनबाद | 208 | 118 |
| हजारीबाग | 195 | 163 |
| गिरिडीह | 194 | 180 |
| बोकारो | 169 | 125 |
| पूर्वी सिंहभूम | 166 | 117 |
| पलामू | 170 | 135 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 117 | 114 |
| देवघर | 121 | 86 |
| रामगढ़ | 126 | 107 |
| दुमका | 134 | 122 |
| सरायकेला-खरसावां | 125 | 107 |
| गुमला | 150 | 136 |
| खूंटी | 100 | 91 |
| गढ़वा | 100 | 72 |
| सिमडेगा | 83 | 82 |
| चतरा | 84 | 77 |
| लातेहार | 83 | 65 |
| गोड्डा | 72 | 64 |
| साहिबगंज | 69 | 55 |
| लोहरदगा | 58 | 51 |
| कोडरमा | 58 | 42 |
| जामताड़ा | 45 | 41 |
| पाकुड़ | 43 | 42 |
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नेशनल हाईवे पर भी हालात चिंताजनक
13 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर 244 दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 196 लोगों की मौत हुई, जबकि 194 लोग घायल हुए।
मृतकों में 59 पैदल यात्री भी शामिल हैं। हालांकि, ये आंकड़े केवल राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े हैं। इन्हें पूरे राज्य में हुई सड़क दुर्घटनाओं का कुल आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
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सितंबर तक सभी जिलों का आंकड़ा क्यों नहीं?
सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़े अलग-अलग जिलों में अलग-अलग समय पर जारी हो रहे हैं। जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों में भी अलग-अलग अवधि की रिपोर्ट सामने आ रही है।
फिलहाल सभी 24 जिलों के लिए जनवरी से सितंबर 2026 की समान अवधि का आधिकारिक समेकित आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए जनवरी-जून के आंकड़ों को सितंबर तक का बताना सही नहीं होगा।
फिर भी उपलब्ध आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि सड़क सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है और कई जिलों में दुर्घटनाओं के साथ-साथ मौतों की संख्या बेहद चिंताजनक है।























