रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज प्रदेश के शासकीय स्कूलों में सहायक अमले और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ढांचे को लेकर एक बड़ा सरकारी आंकड़ा सामने आया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विधानसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 92 (क्र. 462) के लिखित जवाब में राज्य के सभी 33 जिलों के शासकीय हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में भृत्य (चपरासी) के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की आधिकारिक जानकारी पटल पर रखी गई है। इस रिपोर्ट से साफ है कि प्रदेश के कई बड़े जिलों के स्कूलों में चपरासी के पद भारी संख्या में खाली पड़े हैं।

आइए जानते हैं कि सदन में भृत्य (चपरासी) के पदों को लेकर जिलों की क्या ज़मीनी हकीकत सामने आई है।
सबसे पहले अगर हायर सेकेण्डरी स्कूलों में खाली पदों की बात करें तो बलौदाबाजार जिला सबसे खस्ता हाल नजर आ रहा है। बलौदाबाजार जिले के हायर सेकेण्डरी स्कूलों में भृत्य के कुल 478 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से महज 111 कर्मचारी कार्यरत हैं और सबसे ज्यादा 367 पद रिक्त यानी खाली पड़े हैं। इसके बाद बालोद जिले में भी 545 स्वीकृत पदों में से 330 पद खाली हैं। राजधानी रायपुर के हायर सेकेण्डरी स्कूलों में भी 470 स्वीकृत पदों के मुकाबले 238 पद रिक्त चल रहे हैं। धमतरी में 267 पद, बेमेतरा में 258 पद, महासमुन्द में 248 पद और राजनांदगांव में 241 पद खाली पड़े हैं।
इसके बाद अगर हाईस्कूलों के स्तर पर रिक्त पदों की स्थिति को देखें तो यहाँ भी बलौदाबाजार जिला 99 रिक्त पदों के साथ सबसे ऊपर है, जहाँ 120 स्वीकृत पदों में से केवल 21 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इसके अलावा महासमुन्द के हाईस्कूलों में 70 पद, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 58 पद, रायपुर में 55 पद और दुर्ग के हाईस्कूलों में 47 पद खाली पड़े हैं। बिलासपुर में 36 पद और जांजगीर जिले के हाईस्कूलों में 34 पद रिक्त हैं।
अंत में अगर उन जिलों की बात करें जहाँ स्थिति काफी बेहतर है, तो बस्तर संभाग के कुछ जिलों में भृत्य के लगभग सभी पद भरे हुए हैं। बीजापुर, दन्तेवाड़ा और कोण्डागांव के हाईस्कूलों में भृत्य का एक भी पद खाली नहीं है (रिक्त पदों की संख्या 0 है)। दन्तेवाड़ा के हायर सेकेण्डरी स्कूलों में 140 स्वीकृत पदों में से 139 भरे हैं और सिर्फ 1 पद खाली है। इसी तरह नारायणपुर के हायर सेकेण्डरी में 1 पद, बीजापुर में 2 पद और कोण्डागांव के हायर सेकेण्डरी स्कूलों में 347 स्वीकृत पदों में से 344 कार्यरत हैं और केवल 3 पद रिक्त हैं। जशपुर जिले में भी स्थिति मजबूत है, जहाँ हाईस्कूलों में केवल 14 और हायर सेकेण्डरी में 29 पद ही खाली बचे हैं।
विधानसभा पटल पर आई इस रिपोर्ट से साफ है कि जहाँ एक तरफ बस्तर संभाग के जिलों में भृत्य के पदों का प्रबंधन बेहतर है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी इलाकों के बड़े जिलों में भारी कमी के चलते स्कूलों के दैनिक व्यवस्था संबंधी प्रशासनिक कार्यों में परेशानियां आ रही हैं।

