रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को लेकर एक बेहद चिंताजनक सरकारी रिपोर्ट सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विधानसभा तारांकित प्रश्न संख्या 17 के लिखित जवाब में राज्य के सभी 33 जिलों में संचालित सरकारी स्कूलों, उनके स्वयं के भवनों, जर्जर भवनों और भवन विहीन शालाओं की सूची पटल पर रखी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय और स्कूल शिक्षा विभाग महानदी भवन के अधिकारियों द्वारा सत्यापित इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में सैकड़ों स्कूल आज भी बिना छत के चल रहे हैं।
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आइए जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में स्कूली भवनों की वर्तमान जमीनी हकीकत क्या है।
सबसे पहले अगर पूरे प्रदेश के कुल आंकड़ों की बात करें तो प्राथमिक से लेकर हायर सेकेण्डरी स्तर तक कुल 878 स्कूल ऐसे हैं जो पूरी तरह भवन विहीन हैं यानी जिनके पास अपना कोई सरकारी भवन ही नहीं है। इनमें 488 प्राथमिक शाला, 186 माध्यमिक शाला, 150 हाईस्कूल और 54 हायर सेकेण्डरी स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा राज्य में कुल 3931 स्कूल ऐसे हैं जिनकी इमारतें पूरी तरह जीर्णशीर्ण यानी जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं जिससे वहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी है।
इसके बाद अगर जिलों के हिसाब से भवन विहीन स्कूलों की सबसे खराब स्थिति को देखें तो बीजापुर जिला सबसे आगे निकल गया है। बीजापुर जिले में कुल 114 प्राथमिक शालाएं, 7 माध्यमिक शालाएं, 3 हाईस्कूल और 1 हायर सेकेण्डरी स्कूल भवन विहीन है। दूसरे नंबर पर बस्तर जिला है जहाँ 52 प्राथमिक, 30 माध्यमिक, 12 हाईस्कूल और 6 हायर सेकेण्डरी स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है। आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले में भी 53 प्राथमिक और 22 माध्यमिक शालाएं बिना भवन के संचालित हो रही हैं।
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अंत में अगर जर्जर भवनों की मार झेल रहे जिलों की बात की जाए तो बिलासपुर, कोंडागांव और बलौदा बाजार की हालत सबसे ज्यादा खराब है। बिलासपुर जिले में 257 प्राथमिक शालाएं और 43 माध्यमिक शालाएं जर्जर हो चुकी हैं। इसी तरह कोंडागांव जिले में 255 प्राथमिक और 159 माध्यमिक शालाओं के भवन जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं। बलौदा बाजार जिले में भी 153 प्राथमिक स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। राहत की बात केवल यह है कि नारायणपुर और कोरिया जैसे छोटे जिलों में भवन विहीन स्कूलों की संख्या शून्य या बेहद कम है।
























