रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा रायगढ़ जिले में चल रहे जल जीवन मिशन के कार्यों का आधिकारिक लेखा-जोखा पटल पर रखा गया है। मंत्रालय महानदी भवन द्वारा अनुभाग अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी इस विकासखंडवार रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि जिले में मिशन की रफ्तार काफी धीमी है और आधे से अधिक कार्य अब भी पूरे होने की राह देख रहे हैं।
रायगढ़ जिले में जल जीवन मिशन के तहत विकासखंडों की वर्तमान स्थिति क्या है। आइए जानते हैं
सबसे पहले अगर पूरे रायगढ़ जिले के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग द्वारा जिले में कुल 1348 कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इन स्वीकृत कार्यों में से अब तक केवल 671 कार्य ही पूरी तरह से संपन्न हो पाए हैं, जबकि 677 कार्यों की संख्या अब भी अपूर्ण यानी अधूरी बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक स्वीकृत प्रोजेक्ट्स के मुकाबले आधे से ज्यादा काम पेंडिंग होने के कारण ग्रामीणों तक घर-घर नल से जल पहुंचाने की योजना प्रभावित हो रही है।
इसके बाद अगर विकासखंडवार स्थिति को देखें तो लैलूंगा और धर्मजयगढ़ में सबसे ज्यादा लापरवाही और काम लटके होने की बात सामने आई है। धर्मजयगढ़ विकासखंड में सबसे अधिक 299 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 125 पूर्ण हुए हैं और 174 कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं। इसी तरह लैलूंगा विकासखंड में कुल 280 स्वीकृत कार्यों में से महज 92 कार्य ही पूरे हो सके हैं और सबसे ज्यादा 188 प्रोजेक्ट्स फाइलों या जमीनी स्तर पर अटके हुए हैं। तमनार विकासखंड में भी स्थिति चिंताजनक है जहां 135 स्वीकृत कार्यों में से सिर्फ 51 पूर्ण हुए हैं और 84 कार्य अपूर्ण हैं।
अंत में जिले के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो रायगढ़ विकासखंड की स्थिति बाकी जगहों से थोड़ी बेहतर है जहां 154 स्वीकृत कार्यों में से 115 कार्य पूरे कर लिए गए हैं और केवल 39 कार्य ही शेष बचे हैं। इसके अलावा पुसौर विकासखंड में 171 स्वीकृत कार्यों में से 92 पूर्ण और 79 अधूरे हैं। खरसिया विकासखंड में 156 कार्यों में से 102 पूर्ण और 54 अपूर्ण हैं। वहीं घरघोड़ा विकासखंड में कुल 153 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 94 काम पूरे हो चुके हैं और 59 काम अभी भी अधूरे हैं।
विधानसभा में सामने आए इन सरकारी आंकड़ों के बाद अब रायगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी इस महात्वाकांक्षी योजना की लेत-लतीफी को लेकर विभाग और ठेकेदारों की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठना तय है।

