रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों की योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सरकारी दस्तावेज सामने आया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विधानसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 77 (क्र. 430) के लिखित जवाब में राज्य के सभी 33 जिलों में तैनात ऐसे शिक्षकों की सूची पटल पर रखी गई है जो टीईटी उत्तीर्ण हैं और जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन और लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा सत्यापित इस प्रपत्र के आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में बिना टीईटी पास शिक्षकों की संख्या बहुत बड़ी है।
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सबसे पहले अगर बिना टीईटी पास शिक्षकों की सबसे बड़ी संख्या वाले जिलों की बात करें तो बिलासपुर जिला इस सूची में सबसे ऊपर नजर आ रहा है। बिलासपुर जिले के भीतर 5646 शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, जबकि यहाँ केवल 710 शिक्षक ही टीईटी पास हैं। इसके बाद सरगुजा संभाग के जिलों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। सरगुजा जिले में 4510 शिक्षक और बलरामपुर जिले में 4131 शिक्षक बिना टीईटी उत्तीर्ण किए स्कूलों में अध्यापन का कार्य संभाल रहे हैं। इसी तरह सूरजपुर जिले में 3954 शिक्षक और जशपुर जिले में 3632 शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं।
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इसके बाद अगर मध्य छत्तीसगढ़ के बड़े जिलों की स्थिति को देखें तो बलौदाबाजार जिले में 3510 शिक्षक और कोरबा जिले में 2846 शिक्षक टीईटी परीक्षा पास नहीं हैं। सक्ती जिले के भीतर 2768 शिक्षक और रायगढ़ जिले में 2703 शिक्षक बिना टीईटी उत्तीर्ण किए कार्यरत हैं। बस्तर जिले की बात करें तो वहाँ भी बिना टीईटी पास 2797 शिक्षक तैनात हैं जबकि जांजगीर जिले में यह संख्या 1712 है।
अंत में राहत की बात केवल राजधानी रायपुर और मुंगेली जैसे इक्का-दुक्का जिलों में देखने को मिली है। रायपुर जिला पूरे प्रदेश में इकलौता ऐसा जिला है जहाँ टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की संख्या अनुत्तीर्ण शिक्षकों से अधिक है। रायपुर में 3040 शिक्षक टीईटी पास हैं जबकि 1980 शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं। इसी तरह मुंगेली जिले में भी स्थिति बेहतर है जहाँ 1346 शिक्षक टीईटी पास हैं और केवल 934 शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं। इसके विपरीत दुर्ग जिले में 1651, कबीरधाम में 1850 और बेमेतरा में 1973 शिक्षक बिना टीईटी पास काम कर रहे हैं।
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विधानसभा में सामने आई इस आधिकारिक रिपोर्ट के बाद अब प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक नई बहस छिड़ना तय माना जा रहा है।


