रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज स्कूलों में शिक्षकों की पात्रता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के नियमों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने राज्य स्तर पर नीति निर्धारण और टीईटी परीक्षा के नियमों की वर्तमान स्थिति सदन के सामने साफ की है।
आइए जानते हैं कि सदन में शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े नियमों और राहत को लेकर क्या जानकारी सामने आई है।
सबसे पहले शिक्षा के अधिकार और राज्य स्तर पर नीति निर्धारण की बात करें तो विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने सवाल उठाया था कि क्या शिक्षा का विषय समवर्ती सूची में शामिल होने के कारण राज्य सरकार अपने स्तर पर भी नीति का निर्धारण कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने पूछा था कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में शिक्षकों को राहत प्रदान करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि जी हाँ, आंशिक रूप से राज्य स्तर पर नीति निर्धारण किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका लगाने और साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। विधायक ने पूछा था कि क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राज्य शासन द्वारा शीर्ष अदालत में कोई पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिस पर मंत्री ने सीधे शब्दों में ‘जी नहीं’ कहते हुए याचिका दायर करने से इनकार किया है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी साल में दो बार परीक्षा न कराने के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन हमेशा आवश्यकता के अनुरूप ही किया जाता है।
अंत में विभागीय सीमित परीक्षा कराने और पात्रता अंकों में छूट देने की योजना पर भी सरकार का रुख सामने आया। विधायक ने सवाल किया था कि क्या सरकार द्वारा कोई विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कर पात्रता अंकों में छूट देने का कोई प्रयास किया जा रहा है। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने स्पष्ट तौर पर ‘जी नहीं’ कहा और बताया कि ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं किया जा रहा है, इसलिए इसके आगे का कोई प्रश्न उपस्थित ही नहीं होता है।
विधानसभा में सामने आए इस आधिकारिक जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा के नियमों में कोई भी बड़ा बदलाव करने की जगह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत ही आगे बढ़ने वाली है।

