रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज जशपुर जिले में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर एक बड़ी और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार जशपुर जिले में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल या तो जर्जर हो चुके हैं या फिर उनके पास अपनी कोई इमारत ही नहीं है।
आइए जानते हैं जशपुर जिले में स्कूली भवनों की वर्तमान श्रेणीवार ज़मीनी हकीकत क्या है।
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सबसे पहले अगर जशपुर जिले में बिना भवन के चल रहे स्कूलों की बात करें तो कुल 13 स्कूल ऐसे हैं जो पूरी तरह भवन विहीन हैं यानी जिनके पास अपना कोई सरकारी भवन ही नहीं है। इनमें 11 प्राथमिक शालाएं, 1 माध्यमिक शाला और 1 हाईस्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों के पास अपनी छत न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
इसके बाद अगर जिले में जर्जर और जीर्णशीर्ण हो चुके स्कूली भवनों की बात की जाए तो यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। जशपुर जिले के भीतर कुल 109 स्कूलों की इमारतें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। इन जर्जर भवनों में सबसे ज्यादा 87 प्राथमिक शालाएं शामिल हैं। इसके साथ ही 15 माध्यमिक शालाएं, 1 हाईस्कूल और 6 हायर सेकेण्डरी स्कूलों के भवन भी जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं, जहाँ बच्चे हर वक्त खतरे के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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राहत की बात केवल इतनी है कि जिले में कुल 1931 स्कूलों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें से 1918 स्कूलों के पास अपने स्वयं के सरकारी भवन मौजूद हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1384 प्राथमिक शालाओं में से 1373 के पास, 398 माध्यमिक शालाओं में से 397 के पास, 64 हाईस्कूलों में से 63 के पास और सभी 85 हायर सेकेण्डरी स्कूलों के पास अपने खुद के भवन उपलब्ध हैं।
विधानसभा में सामने आई इस रिपोर्ट के बाद अब जशपुर जिले के आदिवासी अंचलों में भवन विहीन स्कूलों के लिए नई इमारतें बनाने और इन 109 जर्जर स्कूलों की मरम्मत तत्काल शुरू करने की मांग उठ रही है।
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