रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज जशपुर जिले के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और एकल शिक्षकीय विद्यालयों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत विधायक श्रीमती गोमती साय द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने जशपुर जिले में वर्तमान में संचालित एकल शिक्षकीय विद्यालयों और वहां की वैकल्पिक व्यवस्था के आधिकारिक आंकड़े सदन के सामने रखे हैं।
आइए जानते हैं कि सदन में जशपुर जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की स्थिति को लेकर क्या अहम जानकारियां सामने आई हैं।
सबसे पहले अगर जशपुर जिले में एकल शिक्षकीय विद्यालयों यानी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूलों की संख्या की बात करें तो मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि जशपुर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत वर्तमान में एकल शिक्षकीय विद्यालयों की कुल संख्या 78 है। इसके बाद पिछले दो वर्षों में इन स्कूलों की संख्या में हुई वृद्धि का आंकड़ा भी मंत्री द्वारा साझा किया गया। उन्होंने सदन को बताया कि साल 2025-26 में 42 विद्यालय एकल शिक्षकीय हुए थे, जबकि साल 2026-27 में 36 और विद्यालय एकल शिक्षकीय हो गए, जिससे पिछले दो साल में कुल 78 विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक ही शेष रह गए हैं।
इसके बाद इन 78 विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों को लेकर मंत्री ने स्थिति साफ की। विधायक ने सवाल किया था कि क्या एक अकेला शिक्षक प्राथमिक स्तर पर पांच कक्षाओं और माध्यमिक स्तर पर तीन कक्षाओं में अकेले अध्यापन का कार्य कर सकता है और इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि इन एकल शिक्षकीय विद्यालयों में पढ़ाई का नुकसान रोकने के लिए संकुल प्राचार्य और संकुल शैक्षिक समन्वयक द्वारा अध्यापन कार्य हेतु वैकल्पिक तौर पर शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है।
अंत में व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उपायों पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि इन स्कूलों में जरूरत पड़ने पर बहुकक्षा बहु स्तरीय पद्धति से अध्यापन कार्य कराया जाता है, जिसमें एक ही शिक्षक एक साथ अलग-अलग कक्षाओं के स्तर के बच्चों को संभालता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जशपुर जिले के इन स्कूलों में शिक्षकों की स्थाई कमी को दूर करने के लिए सीधी भर्ती की कार्रवाई भी अभी प्रक्रियाधीन है जिससे आने वाले समय में रिक्त पदों को भरा जा सकेगा।
विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद अब आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले के स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर सदन से लेकर सड़क तक चर्चा तेज होने के आसार हैं।

