बलरामपुर: बलरामपुर जिले के जिला मिशन समन्वयक (DMC) समग्र शिक्षा चंद्रभूषण प्रसाद की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट से स्थगन (स्टे) आदेश लेकर अपनी कुर्सी बचाने वाले डीएमसी को इस बार शासन ने सीधे निलंबन का आदेश थमा दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सरगुजा संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय निर्धारित किया गया है।
मनमानी ढंग से छात्रावास प्रभारी बदलने का आरोप
चंद्रभूषण प्रसाद पर छात्रावास के प्रभार में मनमानी करने का गंभीर आरोप है। निलंबन आदेश के मुताबिक, डीएमसी ने 24 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर लुरगी रामचंद्रपुर के 50 सीटर छात्रावास की प्रभारी अधीक्षिका आशा पन्ना को हटाकर, प्राथमिक शाला लुरगी की प्रधान पाठक निर्मला जायसवाल को बिना किसी ठोस कारण के प्रभार सौंप दिया था।
शासन ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर अधिकारों का अतिक्रमण माना है। सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति 2025 (तारीख 5 जून 2025) के तहत सभी संलग्नीकरण समाप्त कर दिए गए थे और नए संलग्नीकरण पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद डीएमसी द्वारा अपने स्तर पर प्रभार में फेरबदल करना शासन की नीति का खुला उल्लंघन, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता माना गया है। इसके अलावा आदेश में वित्तीय अनियमितता का भी जिक्र किया गया है। इन सभी बिंदुओं के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत यह कार्रवाई की गई है।
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हाईकोर्ट के स्टे के बाद जमे थे पद पर
निलंबित डीएमसी चंद्रभूषण प्रसाद का मूल पद व्याख्याता का है। इससे पहले भी उन्हें डीएमसी पद से हटाकर सरगुजा के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल निमहा लखनपुर में पदस्थ किया गया था और उनकी जगह संजय सिंह को भेजा गया था।
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इस प्रशासनिक फेरबदल के खिलाफ चंद्रभूषण प्रसाद ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत से स्थगन आदेश मिलने के बाद वे वापस बलरामपुर पहुंचकर बतौर डीएमसी कामकाज संभाल रहे थे। चूंकि शासन स्तर से संजय सिंह की पदस्थापना की गई थी, इसलिए दोनों अधिकारियों के बीच भीतरखाने प्रभार को लेकर विवाद चल रहा था। इसी बीच छात्रावास अधीक्षकों के प्रभार में फेरबदल की शिकायत शासन तक पहुंच गई, जिसके बाद यह निलंबन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वे अंबिकापुर के केदारपुर हायर सेकेंडरी स्कूल में व्याख्याता के पद पर पदस्थ थे और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें बलरामपुर में डीएमसी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।



