लखनऊ:
प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति से पहले उनके चरित्र सत्यापन (कैरेक्टर वेरिफिकेशन) को लेकर एक बेहद सख्त और पारदर्शी नीति लागू कर दी है। प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी नए शासनादेश के तहत हत्या, बलात्कार, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और साइबर ठगी जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी के रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पुरानी जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करते हुए सत्यापन को समयबद्ध, निष्पक्ष और आधुनिक बनाना है।
इन गंभीर अपराधों में लिप्त अभ्यर्थी सीधे होंगे अयोग्य
नई नीति के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों के अपराधों में न्यायालय द्वारा आरोप तय (चार्ज फ्रेम) होने या दोषसिद्धि पाए जाने पर अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए पूर्णतः अपात्र घोषित कर दिया जाएगा:
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जघन्य अपराध: हत्या, डकैती, बलवा, फिरौती के लिए अपहरण, देशद्रोह, आतंकवादी कृत्य, बलात्कार, लज्जा भंग, दहेज हत्या और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले।
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भर्ती माफिया व साइबर अपराध: पेपर लीक में शामिल गिरोह, सॉल्वर गैंग, डमी अभ्यर्थी बैठाने वाले, कूट-रचित (फर्जी) प्रमाण-पत्र बनवाने वाले, डिजिटल अरेस्ट और यूपीआई (UPI) ठगी जैसे साइबर फ्रॉड करने वाले।
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विशेष अधिनियम: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act), धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), गैंगस्टर एक्ट तथा एनडीपीएस (NDPS) एक्ट (अल्प मात्रा को छोड़कर)।
30 दिनों की समय-सीमा तय, गृह विभाग रखेगा नजर
सत्यापन प्रक्रिया को लंबा खींचने की परंपरा पर रोक लगाते हुए 30 दिनों की सख्त समय-सीमा तय की गई है:
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जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सत्यापन का अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी को अनिवार्य रूप से सौंपनी होगी।
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यदि निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं भेजी जाती है, तो शासन का गृह विभाग सीधे मामले का संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करेगा।
मौके पर जाकर नहीं होगी पूछताछ, रिकॉर्ड से होगा सत्यापन
सत्यापन के नाम पर अभ्यर्थियों के उत्पीड़न और अनावश्यक औपचारिकताओं को रोकने के लिए व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप कम किया गया है:
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पुलिस या एलआईयू कर्मी मौके पर जाकर पूछताछ नहीं करेंगे और न ही अभ्यर्थी को थाने में भौतिक रूप से उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जाएगा।
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पूरी रिपोर्ट पुलिस व खुफिया तंत्र के मौजूदा आधिकारिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल डेटाबेस) के आधार पर तैयार की जाएगी।
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सुनवाई का मौका: यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी अपनी अंतिम संस्तुति भेजने से पहले उस अभ्यर्थी को भौतिक या ऑनलाइन माध्यम से अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर (Natural Justice) देंगे।
केवल सत्यापन लंबित होने से नहीं रुकेगी ज्वॉइनिंग
युवाओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया गया है कि मात्र पुलिस सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों का नियुक्ति पत्र नहीं रोका जाएगा:अभ्यर्थी से निर्धारित प्रारूप में स्व-घोषणा पत्र (सेल्फ-डिक्लेरेशन) लेकर उसे औपबंधिक (प्रोविजनल) नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा।हालांकि, यदि बाद में सत्यापन रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल तथ्य सामने आता है या गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी और उसके खिलाफ विधिक (कानूनी) कार्रवाई की जाएगी।


