लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को अधिक चुस्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुख्यालय ने तबादला नीति को लेकर बेहद कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत अब सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर का कोई भी पुलिसकर्मी किसी एक थाने में अधिकतम 3 वर्ष से अधिक समय तक तैनात नहीं रह सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार और अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उठाए गए इस कदम को महकमे में बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
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थाने, सर्किल और जिले में तैनाती की अधिकतम सीमा तय
डीजीपी मुख्यालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार पुलिसकर्मियों के कार्यकाल की स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं: सिपाही, हेड कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर स्तर का कोई भी कर्मी एक थाने में अधिकतम 3 वर्ष ही रह सकेगा।किसी एक सर्किल के अंतर्गत अधिकतम सेवा अवधि 6 वर्ष तय की गई है। किसी भी पुलिसकर्मी की एक जिले में कुल तैनाती की अधिकतम सीमा 10 वर्ष होगी।
निर्धारित समयावधि पूरी होते ही संबंधित पुलिसकर्मी का दूसरे थाने, सर्किल अथवा जिले से बाहर तबादला करना अनिवार्य होगा।
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स्थानीय सांठगांठ और दलाली की कमर तोड़ने की तैयारी
मुख्यालय के इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य थानों में वर्षों से जमे मुंशी, पैरोकार, दारोगा और सिपाहियों के स्थानीय माफिया, असामाजिक तत्वों, दलालों और प्रभावशाली लोगों के साथ बन जाने वाले अवांछित गठजोड़ को समाप्त करना है। अक्सर यह देखा जाता रहा है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहने के कारण पुलिसकर्मी स्थानीय विवादों में निष्पक्षता नहीं बरत पाते थे, जिससे आम जनता की निष्पक्ष सुनवाई बाधित होती थी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता था। इस फेरबदल से थानों की कार्यसंस्कृति में ताजगी और पारदर्शिता आएगी।
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दागी और विवादित कर्मियों को नहीं मिलेगी फील्ड पोस्टिंग
नई तबादला नीति में केवल समय-सीमा ही नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा को भी अनिवार्य पैमाना बनाया गया है। आदेश में साफ किया गया है कि:जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, कदाचार या गंभीर विभागीय जांच लंबित है, उन्हें किसी भी सूरत में थानों में महत्वपूर्ण पदों, चौकियों या फील्ड ड्यूटी जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां नहीं सौंपी जाएंगी।ऐसे कर्मियों को केवल पुलिस लाइन, समन सेल अथवा अन्य गैर-संवेदनशील प्रशासनिक शाखाओं में ही संबद्ध (अटैच) किया जाएगा, ताकि जांच प्रक्रिया और निष्पक्ष जनसेवा प्रभावित न हो सके।


