रायपुर:
छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब पुलिस और आबकारी अमले की कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं और गली-मोहल्लों के पैडलरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नशीले पदार्थों के उत्पादन, परिवहन, अंतरराज्यीय सप्लाई और बड़े वित्तीय फाइनेंसरों के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नशे के हर मामले में स्रोत (सोर्स) से लेकर अंतिम डिलीवरी तक की पूरी बैकवर्ड और फॉरवर्ड सप्लाई चेन की जांच की जाए।
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काली कमाई होगी कुर्क, सीए और विधिक विशेषज्ञों की बनेगी समिति
तस्करी से अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले माफियाओं की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
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सफेमा और NDPS के तहत कुर्की: नशे के काले कारोबार से खड़ी की गई चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर एनडीपीएस एक्ट और सफेमा (SAFEMA) के तहत तत्काल कुर्की व जब्ती की जाएगी।
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विशेषज्ञ समिति की मदद: तस्करों के मनी ट्रेल, हवाला और अवैध वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सहित वित्तीय और कानूनी विशेषज्ञों की एक विशेष समिति गठित की जाएगी।
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वाहनों की नीलामी: तस्करी में प्रयुक्त जब्त वाहनों के राजसातीकरण (कॉन्फिस्केशन) और नीलामी की लंबित प्रक्रियाओं को अगले तीन महीने के भीतर मिशन मोड में निपटाया जाएगा।
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31 दिसंबर तक नष्ट किए जाएंगे 6 माह पुराने सभी जब्त मादक पदार्थ
अदालती और विभागीय प्रक्रियाओं के चलते थानों व मालखानों में वर्षों तक जमा रहने वाले नशीले पदार्थों के सुरक्षित निपटारे के लिए समय-सीमा तय कर दी गई है। गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि 31 दिसंबर 2026 तक सभी छह माह से अधिक पुराने जब्त मादक पदार्थों का विधिक नियमों के तहत शत-प्रतिशत विनष्टीकरण (डिस्पोजल) सुनिश्चित किया जाए।
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मेडिकल स्टोरों पर पहरा, स्कूल-कॉलेजों के पास विशेष निगरानी
सिंथेटिक और फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए ड्रग कंट्रोलर और पुलिस को संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए हैं:
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प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर रोक: मेडिकल स्टोरों की औचक जांच की जाएगी। बिना डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के नशीले कफ सिरप, ट्रामाडोल-अल्प्राजोलम जैसे कैप्सूल, सिरिंज और नीडल बेचने वालों के लाइसेंस तुरंत रद्द कर एफआईआर दर्ज होगी।
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शिक्षण संस्थानों के आसपास सख्ती: स्कूल और कॉलेजों के 100 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों, पान ठेलों और दवा दुकानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि युवाओं को नशे की गर्त में जाने से बचाया जा सके।
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हेल्पलाइन ‘1933’ का होगा प्रचार, जांच में युवाओं की भागीदारी
नशे के खिलाफ इस महाअभियान में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए एंटी-ड्रग हेल्पलाइन नंबर ‘1933’ का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। कोई भी नागरिक इस नंबर पर तस्करों और अवैध बिक्री की गोपनीय सूचना दे सकता है।
समीक्षा बैठक में गृह सचिव नेहा चंपावत, एडीजी (गुप्तवार्ता) अमित कुमार, आईजी अंकित गर्ग सहित सभी संभागों व जिलों के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।


