विभागीय परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल और अंतिम समय में विषय जोड़ना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने परीक्षा परिणाम किया रद्द
**बिलासपुर।** छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी से शिक्षक (एलबी) बने हजारों कर्मचारियों के लिए उच्च न्यायालय से बड़ी और राहत भरी खबर आई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन से पहले की गई सेवा अवधि को पेंशन पात्रता में शामिल करने से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर रिट अपील को खारिज कर दिया है।
**सिंगल बेंच के आदेश को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार**
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है। गौरतलब है कि सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह संविलियन से पूर्व शिक्षाकर्मियों द्वारा दी गई सेवा अवधि को पेंशन गणना में शामिल करने के विषय पर पुनर्विचार करे और इसके लिए एक स्पष्ट व पारदर्शी नीति तैयार करे। सरकार ने इसी आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी, जिसे अदालत ने नकार दिया।
शिक्षकों की पुरानी सेवा अवधि की गणना का रास्ता साफ
इस फैसले के बाद अब सरकार को शिक्षाकर्मियों की संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवा लाभों के लिए जोड़े जाने के मुद्दे पर नए सिरे से नीतिगत निर्णय लेना होगा। याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि वर्षों तक दी गई शिक्षाकर्मी की सेवा को पेंशन पात्रता से बाहर रखना अनुचित है। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षकों की पुरानी पेंशन और सेवा अवधि की गणना से जुड़ी मांगों को बल मिला है।

