रांची:
राजधानी रांची के सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों में अब इलाज के खर्च को लेकर पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत कड़ा आदेश जारी करते हुए सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों को 7 दिनों के भीतर मुख्य प्रवेश द्वार अथवा रिसेप्शन पर अपना निबंधन प्रमाण पत्र (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) और विभिन्न इलाजों का आधिकारिक रेट चार्ट प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अस्पतालों में कार्यरत सभी डॉक्टरों के नाम, शैक्षणिक डिग्री, विशेषज्ञता और मेडिकल काउंसिल की पंजीकरण संख्या को भी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जारी आदेश के मुताबिक चिकित्सा संस्थानों को परामर्श शुल्क (कंसल्टेशन फीस), सामान्य व आईसीयू बेड चार्ज, रूम रेंट, प्रमुख पैथोलॉजिकल व रेडियोलॉजिकल जांचों और बुनियादी प्रक्रियाओं की पूरी दर सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी ताकि मरीज और उनके परिजन उपचार शुरू होने से पहले संभावित खर्च का सही आकलन कर सकें। इसके साथ ही डॉक्टरों के ओपीडी में बैठने का समय, अस्पताल में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं, मरीजों के अधिकार और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्शानी होगी। समय-सीमा के भीतर इन नियमों का पालन न करने वाले क्लीनिकों और अस्पतालों पर विभाग की जांच टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा द्वारा सिविल सर्जन को भेजे गए आधिकारिक पत्र के बाद सामने आई है, जिसमें निजी चिकित्सालयों में इलाज के नाम पर मनमाने शुल्क की रोकथाम के लिए दरें सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई थी। दूसरी तरफ एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स इंडिया (झारखंड चैप्टर) के पैट्रन योगेश गंभीर ने नियमों का स्वागत करते हुए व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि रूम चार्ज, बेड, आईसीयू और बुनियादी जांचों के रेट लिखना संभव है, लेकिन हजारों तरह की जटिल सर्जिकल व मेडिकल प्रक्रियाओं की पूरी सूची दीवार पर लगाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि आयुष्मान और सरकारी दरों का विवरण ऑनलाइन पहले से ही उपलब्ध रहता है।


