कोलकाता
पड़ोसी देश भूटान के लेमथांग क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने (GLOF – Glacial Lake Outburst Flood) की बड़ी घटना के बाद भारत के सीमावर्ती पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बाढ़ का संकट गहरा गया है। झील का अत्यधिक पानी ओवरफ्लो होकर मो छू नदी के रास्ते सीधे संकोश नदी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पानी के बहाव को देखते हुए असम और पश्चिम बंगाल के मैदानी व निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अगले 5 से 6 घंटे बेहद संवेदनशील हैं, क्योंकि सैलाब कभी भी मैदानी बस्तियों तक पहुंच सकता है।
दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स में चेतावनी; संकोश नदी पर ‘रेड अलर्ट’
राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें हालात पर पल-पल नजर बनाए हुए हैं।
-
प्रभावित क्षेत्र: संकोश और उसकी सहायक नदियों के तटीय इलाकों के अलावा दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और तुरंत सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
-
मलबा बहने का खतरा: अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने बताया कि ताजा सूचना के मुताबिक पानी के बहाव की गति में थोड़ी कमी आई है, लेकिन संकोश नदी प्रणाली के लिए रेड अलर्ट बरकरार है। पानी के साथ भारी मात्रा में लकड़ी के लट्ठे, चट्टानें, कंक्रीट का मलबा और मरी हुई मछलियां बहकर आ रही हैं, जिससे पुलों और तटबंधों को बड़ा खतरा हो सकता है।
10 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट, NDRF-SDRF मुस्तैद
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है:
-
राहत शिविरों में व्यवस्था: अलीपुरद्वार जिले में करीब 4,000 से 5,000 लोगों को स्कूल भवनों में बनाए गए राहत शिविरों में ठहराया गया है, जबकि 6,000 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया जा चुका है। शिविरों में सूखा राशन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।
-
बचाव दल तैनात: एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और सिविल डिफेंस के दलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।
-
अंतरराष्ट्रीय समन्वय: भारतीय प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस लगातार भूटान के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि पानी के डिस्चार्ज और जलस्तर की सटीक जानकारी मिलती रहे।
क्या होता है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF), जिसे भूवैज्ञानिक भाषा में ‘जॉकुलह्लॉप’ भी कहा जाता है, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली एक भीषण प्राकृतिक आपदा है।
-
जब ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनके आगे पत्थरों और मिट्टी से बने प्राकृतिक बांधों के पीछे विशालकाय झीलें बन जाती हैं।
-
किसी भूस्खलन, हिमस्खलन या अत्यधिक जलदबाव के कारण जब यह प्राकृतिक कच्चा बांध टूट जाता है, तो लाखों गैलन पानी चंद मिनटों में नीचे की घाटियों की ओर दौड़ पड़ता है।
-
तेज गति से उतरता यह सैलाब रास्ते में आने वाली चट्टानों, पेड़ों और मिट्टी को अपने साथ बहाकर निचले मैदानी इलाकों में भारी तबाही मचाता है।


