छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘विभागीय गलती से हुआ अतिरिक्त भुगतान सरकारी धन, वसूली से छूट केवल असाधारण परिस्थितियों में संभव’
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) पर रोक लगाने को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रस्तावित ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026’ के विधायी प्रक्रिया में लंबित रहने को मौजूदा कानूनों के पालन में ढिलाई का बहाना नहीं बनाया जा सकता। जब तक नया कानून लागू नहीं होता, तब तक शासन-प्रशासन को वर्तमान में लागू नियमों के तहत ही ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रखनी होगी।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
B.Com में पढ़ा बिजनेस इकोनॉमिक्स BA इकोनॉमिक्स के बराबर नहीं, कला/सामाजिक विज्ञान शिक्षक पद से बर्खास्तगी वैध, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
High Court Directives: लाउडस्पीकर और डीजे पर विशेष निगरानी
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे पूरे प्रदेश में प्रभावी और निवारक कदम उठाना जारी रखें: लाउडस्पीकर, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, ध्वनि विस्तारक यंत्रों (Sound Amplifiers) और अत्यधिक शोर पैदा करने वाले पटाखों पर सख्त नियमन लागू किया जाए। ‘साइलेंस ज़ोन’ (अस्पताल, स्कूल आदि के आसपास) और रात के समय (Night Hours) में तेज आवाज और डीजे/लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह पाबंदी और निगरानी रखी जाए।
Solar Eclipse 2026: आज लगेगा साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण; जानिए भारत में क्या होगा असर
छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार
सुनवाई के दौरान गृह विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा दाखिल किए गए व्यक्तिगत शपथपत्र (Affidavit) में बताया गया कि राज्य सरकार ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए एक नया और मजबूत ढांचा तैयार कर रही है:
छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन के लिए गठित प्रारूप समिति ने ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026’ का ड्राफ्ट (हिंदी व अंग्रेजी) तैयार कर लिया है।विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट (मंत्रिपरिषद) के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
जशपुर से दंतेवाड़ा तक सभी 33 जिलों में 14 अगस्त को दौड़ेगी ‘सद्भावना स्वतंत्रता दौड़’
मामले की अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद
हाईकोर्ट ने माना कि नए विधेयक की तैयारी प्रारंभिक स्तर से आगे बढ़ चुकी है और उचित प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रगति को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए और समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद तय की है। हालांकि, कोर्ट ने फिर दोहराया कि प्रक्रिया लंबित रहने तक मौजूदा वैधानिक प्रावधानों को लागू करने में कोई ढिलाई न बरती जाए।

