रायपुर:
छत्तीसगढ़ के गैर-सरकारी (निजी) विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत नामांकित बच्चों की पढ़ाई के बदले मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) राशि में संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रति बालक वास्तविक खर्च का आकलन कर नई दरें तय करने के लिए 7 वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष समिति का गठन किया है। लंबे समय से निजी स्कूल प्रबंधन राशि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, जिसे देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है। यह समिति सरकारी और निजी विद्यालयों में छात्रों पर होने वाले वास्तविक व्यय का ब्योरा जुटाकर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, रायपुर संभाग के संयुक्त संचालक (शिक्षा) को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में वित्तीय और प्रशासनिक संतुलन के लिए रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों के प्रमुख शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रायपुर, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सहायक संचालक (वित्त) पोषण लाल वर्मा तथा समग्र शिक्षा के उप संचालक एस.के. सारस्वत को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा डीईओ कार्यालय दुर्ग के सहायक संचालक, डीईओ कार्यालय रायपुर के सहायक संचालक तथा राजनांदगांव के डोंगरगांव विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। यह समिति सरकारी स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले खर्च का सूक्ष्मता से अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
नियमों के मुताबिक, समिति द्वारा तय की जाने वाली नई दरों का प्रस्ताव राज्य सरकार केंद्र सरकार को भेजेगी। अंतिम रूप से निर्धारित प्रतिपूर्ति राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि 30 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा। इस फैसले का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक खर्च के निष्पक्ष आकलन से निजी स्कूलों को उचित प्रतिपूर्ति मिलेगी, जिससे स्कूलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। उल्लेखनीय है कि इस मांग को लेकर निजी स्कूलों ने पूर्व में राज्यभर में असहयोग आंदोलन भी चलाया था।


