रायपुर: छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में अपनी मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों के खिलाफ अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रशासन ने हड़ताली पटवारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए 48 घंटे के भीतर तत्काल काम पर लौटने का फरमान जारी किया है और सभी को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
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ड्यूटी पर नहीं लौटे तो होगी एकपक्षीय कार्रवाई
बिलासपुर, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया, एमसीबी, धमतरी और बालोद जिले के एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्र के सभी आंदोलनकारी पटवारियों को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर कार्यभार संभालने के सख्त निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पटवारी अपने हल्का मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, बिना अनुमति हड़ताल पर जाने को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन मानते हुए अनुपस्थिति की अवधि को ‘सर्विस ब्रेक’ (सेवा में व्यवधान) घोषित करने की चेतावनी दी गई है।
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ठप पड़े राजस्व कार्य, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
पटवारियों के सामूहिक रूप से काम बंद कर देने के कारण राज्य का पूरा राजस्व अमला ठप हो गया है। इसका सीधा असर आम जनता और किसानों पर पड़ रहा है।
- आगामी धान खरीदी से ठीक पहले होने वाला किसान पंजीयन, एग्रीस्टैक प्रमाणीकरण, डिजिटल फसल सर्वे और गिरदावरी का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
- चक्रवाती तूफान से नष्ट हुई फसलों के नुकसान का आकलन भी खटाई में पड़ गया है, जिससे प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिलने में भारी अड़चन आ रही है।
- तहसील कार्यालयों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, और जाति, निवास व आय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम न होने से आम नागरिक खासे परेशान हैं।
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‘मांग पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल’
प्रशासन के अल्टीमेटम और सख्त कार्रवाई के बीच पटवारी संघ भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। संघ का कहना है कि अल्टीमेटम की अवधि खत्म होने के बाद भी वे काम पर नहीं लौटेंगे और मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। गुस्से में आए पटवारी संघ के सदस्यों ने कई स्थानों पर शासन के इन आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रदेश अध्यक्ष भागवत प्रसाद कश्यप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पटवारियों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और शासन की इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संघ के हौसले पस्त होने वाले नहीं हैं।


