अब 9वीं के बस्ते में ‘सेंगोल’ से लेकर ‘लिज्जत पापड़’ तक का सफर! जानिए एनसीईआरटी की नई किताब की 5 बड़ी बातें
प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज ₹35 प्रति किलो की दर से बेचने और उत्पादन वाले क्षेत्रों से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू की है। इसके बावजूद कई ग्रामीण और छोटे बाजारों में उपभोक्ताओं को सस्ता प्याज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सरकार के मुताबिक बफर स्टॉक का प्याज देश के 100 से अधिक शहरों तक पहुंचाया जा चुका है, लेकिन यह व्यवस्था मुख्य रूप से चुनिंदा शहरों और निर्धारित बिक्री केंद्रों पर केंद्रित है।
60 रुपये के पार बिक रहा प्याज
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सितंबर के दौरान देश का औसत खुदरा प्याज भाव 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर बना हुआ है। कई शहरों में खुदरा कीमतें 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं। महाराष्ट्र के बाजारों में कम आवक के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
लासलगांव जैसे प्रमुख थोक बाजार में भी प्याज के भाव ऊंचे बने हुए हैं। 24 सितंबर के उपलब्ध मंडी आंकड़ों में प्याज का मॉडल भाव करीब ₹4,200 प्रति क्विंटल और अधिकतम भाव ₹5,151 प्रति क्विंटल दर्ज हुआ था।
गांवों में क्यों नहीं मिल रहा कांदा एक्सप्रेस का फायदा?
सरकार की ‘कांदा एक्सप्रेस’ का उद्देश्य उत्पादन वाले क्षेत्रों से बड़े खपत केंद्रों तक बफर स्टॉक का प्याज तेजी से पहुंचाना है। अगस्त 2026 से सरकार ने रेल और सड़क परिवहन के जरिए बफर प्याज की आपूर्ति शुरू की है। लेकिन ₹35 प्रति किलो की बिक्री हर गांव या हर खुदरा दुकान पर नहीं हो रही है। यह सुविधा मुख्य रूप से NCCF, NAFED, केंद्रीय भंडार, मोबाइल वैन और कुछ निर्धारित बिक्री केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को नजदीकी बाजार में सामान्य खुदरा दर पर ही प्याज खरीदना पड़ रहा है। ऐसे इलाकों में परिवहन लागत, स्थानीय मंडी भाव और खुदरा मार्जिन जुड़ने के बाद सरकारी ₹35 किलो वाली कीमत का सीधा लाभ उपभोक्ता तक नहीं पहुंच पाता।
आखिर कब कम होंगे प्याज के दाम?
फिलहाल प्याज की कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की संभावना सीमित दिखाई दे रही है। सितंबर में प्रमुख मंडियों में आवक और आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। नई खरीफ प्याज की फसल की आवक में देरी हुई है और इसी वजह से सितंबर-अक्टूबर में कीमतें ऊंची रहने की बात बाजार विशेषज्ञों ने कही है।
अक्टूबर के आखिर से नवंबर में राहत की उम्मीद जताई जा रही है। नई फसल की आवक बढ़ने पर मंडियों में प्याज की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और थोक भाव में नरमी आने का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, बारिश, फसल की वास्तविक आवक और अलग-अलग राज्यों की स्थानीय मांग के आधार पर कीमतों में बदलाव हो सकता है। (Hindustan Times)
सरकार का ₹35 किलो वाला प्याज कहां मिल रहा है?
केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज ₹35 प्रति किलो की दर पर बेचने के लिए NCCF और NAFED की मोबाइल वैन तथा खुदरा केंद्रों का इस्तेमाल किया है। सरकार के अनुसार 23 सितंबर तक पश्चिम बंगाल में ही करीब 1,400 मीट्रिक टन प्याज ₹35 किलो की दर से वितरित किया जा चुका था और कांदा एक्सप्रेस के जरिए कोलकाता व आसपास के जिलों में अतिरिक्त आपूर्ति की गई। (Press
ऐसे में आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल बड़ी राहत का इंतजार नई फसल की आवक तक रह सकता है। अगर अक्टूबर के अंत और नवंबर में मंडियों में आवक बढ़ती है, तो प्याज के दाम धीरे-धीरे नीचे आने की संभावना है।























