नई दिल्ली:
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को पूरी तरह बाधा-मुक्त और तेज बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। एनएचएआई ने चार लेन और उससे अधिक लेन वाले नेशनल हाईवे पर बैरियर-रहित ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) टोलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए टोल प्लाजा के डिजाइन और बुनियादी ढांचे को मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज) करने से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य टोल बूथों पर वाहनों की लंबी कतारों और प्रतीक्षा समय को पूरी तरह खत्म करना, ईंधन की बर्बादी रोकना और यात्रा को अधिक सुरक्षित व निर्बाध बनाना है।
जारी नीति परिपत्र के अनुसार, अब आगामी और वर्तमान में निर्माणाधीन सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में टोल प्लाजा का निर्माण आधुनिक एमएलएफएफ तकनीक के अनुरूप किया जाएगा। इस तकनीक के तहत वाहनों को टोल चुकाने के लिए किसी भौतिक बैरियर या बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि हाईवे के ऊपर लगी अत्याधुनिक गैंट्री के जरिए वाहन के गुजरते ही इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपने आप टोल कट जाएगा। वाहनों के न रुकने की वजह से पारंपरिक टोल प्लाजा की तुलना में लेन की संख्या को युक्तिसंगत (रेशनलाइज) किया जाएगा, जिससे कम जगह में भी यातायात का प्रवाह तेज और सुगम बना रहेगा।
नए दिशानिर्देशों में टोल प्लाजा लेआउट, लेन कॉन्फ़िगरेशन, गैंट्री की स्थिति, सड़क अवसंरचना, उन्नत प्रकाश व्यवस्था, साइनेज और सहायक सुविधाओं के लिए एक समान मानक तय किए गए हैं। यह नीति उन सभी परियोजनाओं पर लागू होगी जिनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो रही है, जबकि पहले से स्वीकृत या निर्माणाधीन परियोजनाओं में अनुबंध प्रावधानों के तहत इन बदलावों को शामिल किया जाएगा। एनएचएआई ने अपने सभी फील्ड कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे जारी और आगामी दोनों तरह की परियोजनाओं में इन नए मानकों को तत्काल प्रभाव से लागू कराएं।
दिशानिर्देशों में सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है। वाहन चालकों को टोलिंग क्षेत्र की अग्रिम जानकारी देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक परिवर्तनीय संदेश संकेत (VMS), स्पष्ट सूचना पट्टिकाएं और पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, टोल संचालन के सुचारू प्रबंधन के लिए प्रत्येक प्लाजा पर एक प्रशासनिक भवन-सह-परिचालन और रखरखाव (O&M) केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। एनएचएआई का यह कदम देश के राजमार्ग नेटवर्क को वैश्विक मानकों के अनुरूप हाई-स्पीड, सुरक्षित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


