नई दिल्ली:
देश के दूरदराज, वनांचल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए मोबाइल नेटवर्क की ‘नो-सिग्नल’ समस्या का स्थायी समाधान तलाश लिया गया है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ‘डायरेक्ट-टू-डिवाइस’ (D2D) यानी सैटेलाइट-टू-स्मार्टफोन कनेक्टिविटी को लेकर केंद्र सरकार को अपनी ऐतिहासिक सिफारिशें भेज दी हैं। इस नई तकनीक के अमल में आने के बाद ग्रामीणों का सामान्य स्मार्टफोन जमीन पर लगे किसी मोबाइल टावर के बजाय सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से जुड़कर सिग्नल हासिल कर सकेगा। इससे उन इलाकों में भी निर्बाध कॉलिंग और कनेक्टिविटी संभव होगी, जहां भौगोलिक विषमताओं के चलते आज तक मोबाइल टावर नहीं पहुंच सके हैं।
आमतौर पर मोबाइल नेटवर्क पाने के लिए नजदीकी मोबाइल टावर पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन D2D तकनीक के तहत सैटेलाइट स्वयं एक ‘फ्लोटिंग टावर’ की तरह काम करता है। TRAI ने इस सेवा के लिए दो मॉडल सुझाए हैं—पहला, सैटेलाइट के अपने स्पेक्ट्रम (L-बैंड और S-बैंड) के जरिए सीधे फोन से संपर्क, और दूसरा, जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों के स्पेक्ट्रम (600 MHz से 2100 MHz) के साथ सैटेलाइट की साझेदारी। इसके लिए नियामक ने एक नई ऑथराइजेशन कैटेगरी ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क (SCN) प्रोवाइडर’ बनाने की सिफारिश की है, जिसके तहत सैटेलाइट कंपनियां टेलीकॉम कंपनियों को क्षमता देंगी और टेलीकॉम कंपनियां सीधे आम उपभोक्ताओं तक यह सेवा पहुंचाएंगी।
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ग्रामीण भारत और सीमांत क्षेत्रों को मिलेंगे ये 5 बड़े लाभ:
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आपातकाल और मेडिकल इमरजेंसी में संजीवनी:ग्रामीण और सुदूर जनजातीय इलाकों में देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने, प्रसव पीड़ा या दुर्घटना के समय नेटवर्क न होने से एंबुलेंस या डॉक्टर को सूचना देना असंभव हो जाता है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी से ‘जीरो नेटवर्क’ वाले गांवों में भी आपातकालीन नंबरों (112, 108 आदि) पर तुरंत संपर्क किया जा सकेगा।
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बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं में अटूट संपर्क:भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन या तूफान के दौरान अक्सर बिजली गुल होने से मोबाइल टावर ठप हो जाते हैं और गांव बाकी दुनिया से कट जाते हैं। सैटेलाइट नेटवर्क अंतरिक्ष से सीधा काम करता है, इसलिए जमीन पर टावर टूटने के बावजूद आपदा के समय गांव का संपर्क नहीं टूटेगा।
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सरकारी योजनाओं, डीबीटी और बैंकिंग का झंझट खत्म:गांवाें में किसानों और ग्रामीणों को अक्सर किसान सम्मान निधि, महतारी वंदन, मनरेगा मजदूरी का बैलेंस चेक करने या राशन वितरण केंद्र (PDS) पर ई-पॉस (e-PoS) मशीन के बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए ऊंचे टीलों या पेड़ों पर चढ़कर नेटवर्क खोजना पड़ता है। सैटेलाइट नेटवर्क आने से डिजिटल वित्तीय सेवाएं और ओटीपी वेरिफिकेशन घर बैठे पूरा होगा।
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खेतों और जंगलों में सुरक्षा:मवेशी चराने, लकड़ी बीनने या खेती के सिलसिले में घने जंगलों व नदी-नालों के पार जाने वाले ग्रामीणों को जंगली जानवरों का खतरा रहता है या रास्ता भटकने का डर रहता है। सीधी सैटेलाइट कनेक्टिविटी होने पर संकट के वक्त खेत-खलिहान से भी तुरंत मदद बुलाई जा सकेगी।
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विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं होगी बाधित:सुदूर इलाकों के छात्रों को ऑनलाइन कक्षाएं लेने, फॉर्म भरने या परीक्षा परिणाम देखने के लिए कई किलोमीटर दूर शहर या मुख्य सड़क तक नहीं जाना पड़ेगा।
दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा अंतिम मंजूरी मिलने और तकनीकी नियम तय होने के बाद ही यह सेवा धरातल पर उतरेगी। इसके अलावा, सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी को सपोर्ट करने वाले नए चिपसेट युक्त स्मार्टफोन्स के बाजार में आने के बाद ग्रामीणों को ‘नो नेटवर्क’ के दर्द से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।


