नई दिल्ली:
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों व पेंशन संशोधन के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के औपचारिक गठन को एक वर्ष पूरा हो गया है। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने की समय-सीमा दी गई है। एक साल का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भारी इजाफे को लेकर कई तरह के दावे और अनुमान तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इन चर्चाओं और अटकलों के बीच आयोग की वास्तविक प्रगति, बैठकों के दौर और दावों की पड़ताल करती यह विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है।
केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 28 अक्तूबर 2025 को आयोग के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) को मंजूरी दिए जाने के बाद, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 3 नवंबर 2025 को इसका औपचारिक गठन किया था। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस तीन सदस्यीय आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) और पंकज जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं। तय नियमों के अनुसार, आयोग को मई 2027 (लगभग 3 मई 2027) तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी होगी। आयोग के दायरे में केंद्रीय सिविल कर्मचारी, ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारी, सशस्त्र बलों के जवान व अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेशों के कार्मिक और निर्दिष्ट न्यायिक व नियामक निकायों के कर्मचारी व पेंशनर्स शामिल हैं।
अपने एक साल के कार्यकाल में आयोग ने परामर्श और डेटा जुटाने की प्रक्रिया में ठोस प्रगति की है। आयोग ने 5 फरवरी 2026 को मायगॉव (MyGov) पोर्टल पर 18 प्रश्नों की एक विस्तृत प्रश्नावली लॉन्च की थी, जिसे 31 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी संगठनों और विभिन्न सेवा संघों से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 15 जून 2026 तक औपचारिक ज्ञापन प्राप्त किए गए। शोध और डेटा विश्लेषण को सुचारू बनाने के लिए अप्रैल 2026 में कंसल्टेंट्स गाइडलाइंस जारी की गईं, जिन्हें 11 अगस्त 2026 को संशोधित किया गया। इसके साथ ही आयोग ने लद्दाख, लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता, दिल्ली, जयपुर, चेन्नई, पुदुचेरी, चंडीगढ़, बेंगलुरु और मुंबई सहित देश के प्रमुख शहरों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों से सीधे संवाद स्थापित किया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ₹25,000 की मूल पेंशन के बढ़कर ₹87,500 होने के दावों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की गई है। यह आंकड़ा केवल कर्मचारी संगठनों द्वारा 3.5 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग पर आधारित एक काल्पनिक गणना है, जिस पर सरकार या आयोग की ओर से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। यूनियनों ने न्यूनतम बेसिक वेतन ₹69,000 करने और 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है, जबकि 2.57, 2.86, 3.00 और 3.15 जैसे विभिन्न फॉर्मूलों पर भी चर्चाएं जारी हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि आयोग ने अभी अपनी सिफारिशें नहीं दी हैं और कोई भी निर्णय रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। मई 2027 में रिपोर्ट आने के बाद कैबिनेट समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने पर ही नई दरें प्रभावी होंगी। तब तक कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को सोशल मीडिया की अफवाहों से बचकर केवल वित्त मंत्रालय और पीआईबी की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।


