लोहंडीगुड़ा। प्राकृतिक आपदा की घड़ी में जरूरतमंद परिवारों की सहायता और उनके दुख-दर्द में सहभागी बनने के उद्देश्य से सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, विकासखंड इकाई लोहंडीगुड़ा द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया। इस मानवीय पहल के तहत विभिन्न प्रभावित गांवों एवं पारा-मोहल्लों के कुल 146 परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: प्राथमिक शिक्षक पद के लिए केवल B.Ed डिग्री मान्य नहीं, D.El.Ed अनिवार्य
राहत सामग्री वितरण के अंतर्गत ग्राम चंदनपुर के लिटी भाटा पारा में 63 परिवारों,कोड़ेबेड़ा में 7 परिवारों तथा बड़ाजी खास पारा,64 टाकरागुड़ा अटार पारा में 12 सहित 146परिवारों को सहायता प्रदान की गई। इस दौरान प्रभावित परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक राहत सामग्री वितरित की गई।*
VSK ऐप से ऑनलाइन हाजिरी में 264 शिक्षक गायब: DPI ने 2 दिनों में मांगी रिपोर्ट
कार्यक्रम में फेडरेशन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। उपस्थित सदस्यों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है। इस पहल के माध्यम से शिक्षकों ने सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया।*
*कार्यक्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी शालिनी तिवारी, बीआरसी पीलाराम सिंहा, सहायक शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष देवराज खूंटे, जिला सचिव गणेश्वर नायक जिला कोषाध्यक्ष एस .एस. जान, ब्लॉक अध्यक्ष कमलसाय कश्यप, उपाध्यक्ष अनिल मरकाम, ब्लॉक सचिव धर्मेंद्र मरकाम, मीडिया प्रवक्ता महेंद्र मंडावी, खगेश्वर सिंह सेठिया, जगतू राम बघेल, दीपक मंडावी, मोतीलाल सोरी, बुधनी कश्यप, सेवक सूर्यवंशी, श्रद्धा दीप देवांगन, प्रीतेश चंद्रा ,तथा ग्राम सचिव रतिराम यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
*सभी उपस्थित सदस्यों ने राहत सामग्री वितरण में अपना योगदान देते हुए प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पहल से सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक एकजुटता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूती मिली।
*सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, विकासखंड इकाई लोहंडीगुड़ा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय जरूरतमंदों की मदद करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है। संगठन ने इस पहल के माध्यम से संदेश दिया कि संकट की घड़ी में एकजुट होकर जरूरतमंद परिवारों की सहायता करना ही सच्ची सामाजिक सेवा है।*


