धर्म डेस्क:
आगामी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही पवित्र चतुर्मास की शुरुआत हो रही है, जो 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य एवं धर्माचार्य डॉ. संदीप पाठक के अनुसार, चतुर्मास का यह समय आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद विशेष माना जाता है।
मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम
चतुर्मास के प्रारंभ होते ही सभी प्रकार के शुभ व मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। डॉ. संदीप पाठक ने बताया कि इस अवधि के दौरान:
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विवाह व सगाई
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गृह प्रवेश
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मुंडन संस्कार
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यज्ञोपवीत (जनेऊ)
तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य बंद रहेंगे। ये सभी कार्य 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही पुनः प्रारंभ हो सकेंगे।
चातुर्मास में क्या नहीं करना चाहिए?
- विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करने से बचें।
- झूठ, क्रोध, अहंकार और कटु वचन से दूर रहें।
- मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- अधिक तला-भुना, मसालेदार और तेलयुक्त भोजन से परहेज करें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बैंगन और पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करें।
- अनावश्यक विवाद, नकारात्मक सोच और दूसरों की निंदा से बचें।
- भोग-विलास और असंयमित जीवनशैली से दूरी बनाए रखें।
- संयम, अनुशासन और सात्विक आचरण का पालन करें।
भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का काल
धर्माचार्यों के अनुसार, चतुर्मास की यह अवधि केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर प्रदान करता है।
चातुर्मास में किन नियमों का पालन करें?
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और दिन की शुरुआत करें।
- भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें।
- विष्णु मंत्रों का जाप और नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- सात्विक और शुद्ध भोजन का सेवन करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन, वचन व कर्म की पवित्रता बनाए रखें।
- यथासंभव सादगीपूर्ण जीवन अपनाएं। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, दीपक और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
- श्रद्धा और क्षमता अनुसार फर्श पर विश्राम करने का संकल्प लें।
- अधिक से अधिक समय पूजा, जप, तप और भक्ति में बिताएं।

