प्रदेश में शिक्षकों के 50472 पद खाली, 2104 पदों पर हुई भर्ती और 5000 पर प्रक्रिया जारी
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है। विभाग के अंतर्गत विधायक श्री इन्द्र कुमार साहू द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने राज्य में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों यानी बीईओ (BEO) की स्थापना, स्वीकृत पदों और भर्ती के नियमों की पूरी स्थिति सदन के सामने साफ की है।
आइए जानते हैं कि सदन में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति और खाली पदों को लेकर क्या जानकारी सामने आई है।
सबसे पहले अगर प्रदेश में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के खाली पदों की बात करें तो इस मोर्चे पर विभाग की स्थिति काफी मजबूत नजर आई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने आधिकारिक आंकड़ा देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के कुल 146 पद स्वीकृत हैं। राहत की बात यह है कि इन सभी 146 स्वीकृत पदों के विरुद्ध वर्तमान में 146 अधिकारी कार्यरत हैं। सभी पदों पर अधिकारियों के तैनात होने की वजह से इस समय विभाग में विकासखंड शिक्षा अधिकारी का एक भी पद रिक्त यानी खाली नहीं है।
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इसके बाद इन पदों पर होने वाली भर्ती और पदोन्नति के नियमों को लेकर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। विधायक ने सवाल किया था कि स्वीकृत पदों में से कितने पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं और कितने पदोन्नति से भरे जाने का नियम है। इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी का पद सीधी भर्ती का नहीं होता है। नियमों के मुताबिक इस पद के कुल 75 प्रतिशत पद सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी की पदोन्नति यानी प्रमोशन के जरिए भरे जाने का प्रावधान तय है।
अंत में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में स्कूलों के प्राचार्यों को जिम्मेदारी दिए जाने के नियम और उनके अनुभव को लेकर स्थिति साफ की गई। विधायक ने पूछा था कि क्या इस पद पर प्राचार्यों को नियुक्त करने का नियम है और इसके लिए कितने वर्षों का अनुभव जरूरी है। इस पर मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि जी हां, प्राचार्यों को विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ किए जाने का प्रावधान विभाग में मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पद पर जिम्मेदारी संभालने के लिए प्राचार्य के रूप में किसी भी निश्चित वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य नहीं है। वर्तमान में राज्य के भीतर कितने प्राचार्यों को विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है, उसकी पूरी विकासखंडवार नामजद सूची भी संलग्न प्रपत्र के रूप में सदन के पटल पर रखी गई है।
विधानसभा में सामने आई इस जानकारी से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में शिक्षा अधिकारियों के पद पूरी तरह भरे हुए हैं जिससे जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कामकाज बेहतर ढंग से चल रहा है।
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