देशभर में ‘धान का कटोरा’ के नाम से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ के बाज़ारों में इन दिनों चावल के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रदेश में धान का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद आम जनता को अपनी थाली के निवाले के लिए अतिरिक्त जेब ढीली करनी पड़ रही है। दक्षिण और मध्य भारत के अन्य उत्पादक राज्यों से आने वाली लोकप्रिय, बारीक और खुशबूदार चावल की किस्मों में 20 से लेकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे मध्यम और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
यूपी के 28 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों की दिवाली होगी रोशन: 3% डीए बढ़ोतरी की तैयारी, खाते में आएगा एरियर
खुदरा बाजारों में प्रमुख किस्मों के दाम में भारी उछाल
भिलाई और दुर्ग के खुदरा व थोक किराना बाजारों में दैनिक उपभोग की लोकप्रिय किस्मों के भाव तेजी से चढ़े हैं:
-
जीरा फूल /जौ फूल राइस: कुछ सप्ताह पहले तक 90 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जीरा राइस अब सीधे ₹120 -140 प्रति किलो के पार पहुंच गया है।
-
काली मूंछ: 65 रुपये प्रति किलो से बढ़कर इसके दाम ₹85 प्रति किलो हो चुके हैं।
-
‘जय श्री राम’ ब्रांड: इस किस्म की कीमत 62 रुपये से उछलकर सीधे ₹100 प्रति किलो पर पहुंच गई है।
-
‘अब्बा हुजूर’ चावल: 70 रुपये प्रति किलो से छलांग लगाकर यह किस्म ₹110 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है।
हाईकोर्ट के तीन बड़े फैसले: रेलवे भू-विस्थापित को रोजगार नीति का लाभ, शिक्षक को 30 दिन में ₹19.92 लाख ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश; वैवाहिक संबंध बहाली की पति की अपील खारिज
उत्पादक राज्यों में फसल खराबी और सप्लाई चेन बनी मुख्य वजह
थोक डीलरों और किराना व्यापारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में मोटे और मध्यम ग्रेड के धान की बंपर पैदावार होती है, लेकिन खुशबूदार, पतली और विशेष किस्मों के लिए स्थानीय बाजार काफी हद तक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों पर निर्भर रहता है। हाल के दिनों में इन दक्षिणी और तटीय राज्यों में बेमौसम बारिश और बाढ़ के कारण धान की खड़ी फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते अंतरराज्यीय आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बाधित हुई है और आवक कम होने से मांग-आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ा है।
चक्रवात ‘अर्नब’ का असर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में रेड अलर्ट, रायपुर-बिलासपुर जशपुर समेत 16 जिलों में 29 अक्टूबर को स्कूल बंद; आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अवकाश
घरेलू बजट पर सीधा वार: हर महीने 700 से 800 रुपये का अतिरिक्त बोझ
चावल राज्य के नागरिकों का मुख्य और दैनिक आहार है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एक सामान्य परिवार महीने में औसतन 25 किलोग्राम चावल की खपत करता है और कीमतों में 30 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि होती है, तो उस परिवार की रसोई पर हर महीने 750 रुपये का सीधा अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान यह महंगाई आम उपभोक्ता की मुश्किलें और बढ़ा रही है।
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1812 पदों पर भर्ती के लिए सीबीटी परीक्षा 31 अक्टूबर से* *प्रदेश के 24 परीक्षा केंद्रों में शामिल होंगे 34 हजार 604 अभ्यर्थी
स्थानीय स्तर पर बारीक और सुगंधित धान की खेती को प्रोत्साहन देने की मांग
राशन विक्रेताओं और बाजार जानकारों का मानना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए। छत्तीसगढ़ के भीतर ही किसानों को बारीक और सुगंधित धान की किस्मों के उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विशेष प्रोत्साहन मिलना चाहिए। स्थानीय स्तर पर इन किस्मों की बड़े पैमाने पर पैदावार होने से दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म होगी, अंतरराज्यीय परिवहन लागत में बचत होगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण चावल उपलब्ध हो सकेगा।


