मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के चलते घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार की सुबह भारी गिरावट दर्ज की गई। चौतरफा बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में गहरे गोते लगाते दिखे, जिससे शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए।
कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 555 अंक गिरकर 74,272.40 के स्तर पर खुला। सुबह 9:20 बजे तक बिकवाली का दबाव और बढ़ गया और सेंसेक्स 643.55 अंक (0.86%) की तेज गिरावट के साथ 74,184.70 पर कारोबार करता नजर आया।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 50 सुबह 23,221.80 पर खुलने के बाद 9:21 बजे 215.30 अंक (0.92%) लुढ़ककर 23,231.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण
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19 साल के उच्चतम स्तर पर बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई जोरदार तेजी ने इक्विटी बाजारों के आकर्षण को कम किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकल रहा है।
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फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती टालने या दरें बढ़ाने की आशंकाओं से निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देश के लिए चालू खाता घाटे और महंगाई का जोखिम बढ़ा है।
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कमजोर वैश्विक संकेत: एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के चलते घरेलू बाजार में शुरुआत से ही सेंटिमेंट कमजोर बना रहा।
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रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है।
सेंसेक्स: टॉप गेनर्स और लूजर्स की स्थिति (सुबह 9:24 बजे)
बैंकिंग और वित्तीय सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली:
निफ्टी 50: प्रमुख चढ़ने और गिरने वाले शेयर (सुबह 9:44 बजे)
निफ्टी में एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस सबसे बड़े ड्रैग साबित हुए:
बाजार पर जानकारों की राय
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल जब तक स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) बना रहेगा। जब तक निफ्टी अहम सपोर्ट लेवल्स को दोबारा हासिल नहीं करता, तब तक खुदरा निवेशकों को आक्रामक खरीदारी से बचते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।























