सिमडेगा:
झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के त्रिवेणी संगम पर स्थित सुप्रसिद्ध पवित्र तीर्थ स्थल रामरेखा धाम में कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर लगने वाले पारंपरिक रामरेखा धाम महोत्सव (मेले) की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय भव्य मेले में झारखंड समेत सीमावर्ती राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन और कुंड में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में 14 वर्ष के वनवास के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण ने दंडकारण्य भ्रमण के दौरान रामरेखा धाम की प्राकृतिक कंदराओं (गुफा) में कुछ समय बिताया था। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीराम ने अपने धनुष की नोक से एक रेखा खींची थी, जिसे आज भी ‘रामरेखा’ के नाम से पूजा जाता है। धाम परिसर में स्थित गुप्त गंगा, सीता चूल्हा, राम जानकी मंदिर, चरण पादुका और प्राचीन शिवलिंग श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र हैं। कार्तिक पूर्णिमा की ब्रह्मवेला में यहां के पवित्र कुंड में स्नान करने और अखंड हरिकीर्तन में शामिल होने का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
महोत्सव के विशाल स्वरूप को देखते हुए जिला प्रशासन और रामरेखा धाम विकास समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पहाड़ी पर स्थित मुख्य गुफा तक पहुंचने वाले रास्तों, सीढ़ियों, प्रकाश व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, सचल शौचालय और स्वास्थ्य शिविरों की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला परिसर और धाम क्षेत्र में दंडाधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।
मेले के दौरान छत्तीसगढ़ के जशपुर, रायगढ़ और झारखंड के सिमडेगा, गुमला आदि जिलों से आने वाले वाहनों के लिए तलहटी में सुव्यवस्थित पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। साथ ही, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाओं और सेवा शिविरों में विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहेंगी।



