नई दिल्ली:
त्योहारी सीजन के बीच भारतीय बाजारों में सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। पिछली दिवाली से लेकर इस साल तक बादाम, काजू, किशमिश और पिस्ता के दामों में औसतन 10 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पिस्ता जैसे खास मेवों के भाव लगभग दोगुने स्तर पर पहुंच गए हैं। कीमतों में आए इस तेज उछाल ने जहां आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है, वहीं दिवाली पर उपहार बांटने वाली कॉरपोरेट कंपनियों और उपहार पैक बेचने वाले व्यापारियों की गणित भी बिगाड़ दी है। बाजार में गिफ्ट पैकों की कीमतों में 100 से 200 रुपये तक की वृद्धि कर दी गई है।
कारोबारियों और द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में सबसे ज्यादा उछाल पिस्ता की कीमतों में दर्ज किया गया है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हुई है। इसके अलावा, अमेरिका के कैलिफोर्निया में इस साल पिस्ता की फसल सामान्य से लगभग 40 फीसदी कम रहने का अनुमान है। ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति घटने और आयात लागत बढ़ने से थोक बाजार में पिस्ता 50 फीसदी तक और खुदरा बाजार में करीब 2,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा है।
अन्य प्रमुख मेवों की कीमतों में भी जोरदार तेजी आई है। बाजार में बादाम की कीमतें 20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 900 रुपये से उछलकर 1,300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। किशमिश के दामों में 50 से 60 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है, जबकि काजू और अखरोट की गिरी के भावों में भी बढ़त देखी जा रही है। कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर दिवाली के पारंपरिक गिफ्ट पैक्स पर पड़ा है। आकर्षक डिब्बों में बिकने वाले इन पैकों की कीमत बाजार में 300 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक है, लेकिन कारोबारियों ने लागत निकालने के लिए हर पैक के दाम 100 से 200 रुपये तक बढ़ा दिए हैं।
लागत के बढ़ते दबाव को देखते हुए कंपनियों ने अपनी कॉरपोरेट गिफ्टिंग रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कई कंपनियां अपने गिफ्ट पैक्स का वजन या आकार छोटा कर रही हैं, जबकि कुछ पैकों में महंगे पिस्ता और बादाम की मात्रा घटाकर सस्ते विकल्पों को शामिल किया जा रहा है, ताकि तय बजट के भीतर कर्मचारियों और क्लाइंट्स को उपहार दिए जा सकें। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं होता और वैश्विक स्तर पर माल की उपलब्धता सामान्य नहीं होती, तब तक घरेलू बाजार में सूखे मेवों की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।


