छत्तीसगढ़ में व्याख्याता पदों पर भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण मामलों में कड़े और संवेदनशील फैसले सुनाए हैं। इनमें नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भसमापन का मामला, कोरोना काल के कारण प्रभावित हुई अनुकंपा नियुक्ति का प्रकरण और सड़कों पर खतरनाक स्टंटबाजी पर रोक लगाने के निर्देश शामिल हैं।
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दुष्कर्म पीड़िता को 31 सप्ताह से अधिक के गर्भसमापन की अनुमति
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की कथित घटना से गर्भवती हुई एक नाबालिग पीड़िता की गर्भसमापन की मांग को स्वीकार कर लिया है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने धमतरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिया है कि पीड़िता को तत्काल रायपुर के सरकारी चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराया जाए और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में कानून के अनुसार गर्भसमापन प्रक्रिया पूरी की जाए।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भावस्था 31 सप्ताह छह दिन की थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दुष्कर्म से जुड़ी गर्भावस्था में मानसिक पीड़ा को कानून गंभीर चोट मानता है। नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर करना उसकी गरिमा, निजता, शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी अधिकारों का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने रायपुर के सीएमएचओ को एंबुलेंस, रक्त, नवजात देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहायता सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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कोरोना काल के कारण अटकी अनुकंपा नियुक्ति पर बड़ी राहत
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए जरूरी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) यदि कोरोना काल के दौरान आयोजित नहीं हो सकी, तो अभ्यर्थी को केवल तीन साल की समय-सीमा के आधार पर अपात्र नहीं माना जा सकता।
धमतरी जिले के हसदा निवासी 35 वर्षीय तोमिन साहू की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था। तोमिन के पति की मृत्यु 24 मई 2018 को हुई थी और उन्हें तीन साल के भीतर योग्यता हासिल करनी थी। उन्होंने 2020 में डीएड पूरा कर टीईटी के लिए आवेदन किया, लेकिन कोविड महामारी के कारण परीक्षा समय पर नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को 50 दिन के भीतर उनके आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
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खतरनाक बाइक स्टंट और हाईवे पर बर्थडे मनाने पर कड़े निर्देश
छत्तीसगढ़ में सड़कों पर खतरनाक तरीके से मोटरसाइकिल स्टंट करने और हाईवे पर बर्थडे मनाने की बढ़ती घटनाओं पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस श्री महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की युगलपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में इस मामले पर सुनवाई की और कहा कि पुलिस महानिदेशक स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद इन गतिविधियों से सख्ती से निपटने के लिए विशेष दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।
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