रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया के बीच बिजली मीटर रीडरों के भविष्य और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां तकनीक के बदलाव से रोजगार छिनने की चिंता सता रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी प्रबंधन ने मीटर रीडरों के मानदेय में एक बार फिर कटौती कर दी है। मौजूदा अनुबंध (एग्रीमेंट) समाप्त होने से महज एक माह पहले प्रबंधन ने प्रति उपभोक्ता मीटर रीडिंग और बिलिंग की दर 8 रुपये से घटाकर 7 रुपये कर दी है।
दो साल में ₹2 की कटौती, ₹9 से घटकर ₹7 पर आया मानदेय
मीटर रीडरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने तय नियमों और एग्रीमेंट की अवधि के बीच में ही मानदेय में एकतरफा कटौती का फैसला लिया है। रीडरों के मुताबिक, पूर्व में प्रति उपभोक्ता रीडिंग के लिए 9 रुपये का अनुबंध हुआ था। पिछले साल इसमें कटौती कर दर को 8 रुपये कर दिया गया था और अब एग्रीमेंट खत्म होने से ठीक पहले इसे घटाकर 7 रुपये प्रति उपभोक्ता कर दिया गया है। लगातार हो रही इस कटौती से फील्ड में काम कर रहे हजारों रीडरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
समाधान योजना की प्रोत्साहन राशि भी 5 माह से बकाया
मानदेय में कटौती के साथ-साथ प्रोत्साहन राशि न मिलने से भी मीटर रीडरों में भारी रोष है। बिजली कंपनी की ‘समाधान योजना’ के तहत उपभोक्ताओं को प्रेरित कर बकाया राशि वसूलने के एवज में रीडरों को इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) दी जानी थी। रीडरों का कहना है कि उन्होंने फील्ड में कड़ी मेहनत कर वसूली का काम किया, लेकिन बीते करीब पांच महीनों से इस प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
29 सितंबर को डंगनिया मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन
कंपनी प्रबंधन के इन फैसलों के खिलाफ मीटर रीडर श्रमिक संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ ने 29 सितंबर को राजधानी रायपुर के डंगनिया स्थित विद्युत वितरण कंपनी मुख्यालय के घेराव और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। संघ ने प्रबंधन को विधिवत ज्ञापन और आंदोलन की सूचना सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मानदेय कटौती वापस नहीं ली गई और बकाया प्रोत्साहन राशि का भुगतान तुरंत नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।























