आगामी 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक राशि के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के प्रस्ताव के खिलाफ देशभर के कारोबारियों ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों के शीर्ष संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज’ (CTI) ने इस फैसले के विरोध में आगामी 2 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी ‘नो UPI डे’ (No UPI Day) मनाने का ऐलान किया है। संगठन ने दिल्ली सहित देशभर के खुदरा दुकानदारों, व्यापारियों और प्रतिष्ठानों से अपील की है कि वे उस दिन अपने काउंटर पर रखे यूपीआई क्यूआर (QR) कोड और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर केवल नकद (कैश) में लेन-देन करें।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर यदि व्यापारियों से शुल्क वसूला गया, तो इससे अर्थव्यवस्था में दोबारा नकदी लेन-देन का चलन तेजी से बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के छोटे-बड़े दुकानदारों, खुदरा कारोबारियों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर ने डिजिटल लेन-देन को पूरी तरह अपनी दैनिक दिनचर्या में ढाल लिया था। अब यदि व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जाएगा, तो वे ऑनलाइन पेमेंट लेने से बचेंगे। सीटीआई का अनुमान है कि इस नियम के प्रभाव में आने के बाद ₹2,000 से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन में 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
व्यापारी संगठन ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित नियमों के तहत बड़े लेन-देन पर अधिकतम ₹300 तक का एमडीआर शुल्क सीधे दुकानदार की जेब से कटेगा, जिससे व्यापारिक मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।
सीटीआई ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कैशलेस और पारदर्शी अर्थव्यवस्था की दिशा में जो लंबी छलांग लगाई है, एमडीआर लगाने से उस पूरे डिजिटल इंडिया अभियान को बड़ा झटका लग सकता है। देश भर के व्यापारी वर्ग में इस कदम को लेकर भारी निराशा और आक्रोश है, जिसके चलते गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराते हुए डिजिटल माध्यमों का बहिष्कार किया जाएगा।























