बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर वर्षों तक निर्णय न लेने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जल संसाधन विभाग के दिवंगत कर्मचारी की बहू द्वारा 6 साल पहले किए गए आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने विभाग को 40 दिनों के भीतर कानून के अनुसार अंतिम फैसला लेने का सख्त निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद जारी किया।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम धनिया निवासी 54 वर्षीय शांति बाई यादव (पति संतूराम यादव) के ससुर जल संसाधन विभाग में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2017 में सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। ससुर के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शांति बाई ने आश्रित परिजन के रूप में अनुकंपा नियुक्ति के लिए 28 नवंबर 2020 को विभाग के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था।
दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद खटखटाया अदालत का दरवाजा
याचिकाकर्ता के अनुसार, आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर जमा कर दिया गया था। इसके बावजूद विभाग ने पिछले 6 सालों में न तो आवेदन स्वीकार किया और न ही कोई स्पष्ट कारण बताते हुए निरस्त किया। विभागीय स्तर पर लगातार हो रही देरी और उपेक्षा से परेशान होकर उन्होंने अधिवक्ता रवि कुमार भगत के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि किसी भी आश्रित परिवार के लिए अनुकंपा नियुक्ति त्वरित राहत का साधन होती है, लेकिन वर्षों तक आवेदन को अनिर्णीत रखना सीधे तौर पर नियमों और मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी है।
शासन की सहमति के बाद कोर्ट ने तय की 40 दिन की मियाद
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता अनिल पांडेय ने पक्ष रखते हुए कहा कि यदि 28 नवंबर 2020 का आवेदन कार्यपालन अभियंता या सक्षम अधिकारी के पास अभी भी लंबित है, तो विभाग विधिक प्रावधानों के अनुरूप उस पर विचार कर नियमानुसार फैसला लेगा।
शासकीय अधिवक्ता की इस सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी किए बिना याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 40 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी शांति बाई के आवेदन पर कानून के तहत विचार कर उचित और अंतिम निर्णय सुनिश्चित करें।























