Cardiogenic Shock: हार्ट अटैक को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इसके बाद कार्डियोजेनिक शॉक (Cardiogenic Shock) जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है।

क्या होता है कार्डियोजेनिक शॉक?
कार्डियोजेनिक शॉक अक्सर गंभीर हार्ट अटैक के बाद हो सकता है। जब हार्ट की मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है, तो दिल की पंपिंग क्षमता काफी कम हो जाती है। इसके कारण ब्लड प्रेशर तेजी से गिर सकता है और मस्तिष्क, किडनी तथा दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
हार्ट अटैक के अलावा गंभीर हार्ट फेलियर, मायोकार्डिटिस और कुछ गंभीर हार्ट वाल्व संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
कार्डियोजेनिक शॉक में अचानक कई गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
- सीने में तेज दर्द या दबाव
- सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी
- अचानक ठंडा और चिपचिपा पसीना आना
- नाड़ी का बहुत तेज या कमजोर होना
- चक्कर, भ्रम या अत्यधिक घबराहट
- अचानक कमजोरी या बेहोशी

इलाज में हर मिनट अहम
कार्डियोजेनिक शॉक एक मेडिकल इमरजेंसी है। अस्पताल में डॉक्टर स्थिति के अनुसार ECG, इकोकार्डियोग्राफी और अन्य जांच कर सकते हैं। मरीज को ब्लड प्रेशर और हार्ट की पंपिंग को सपोर्ट करने वाली दवाएं दी जा सकती हैं। अगर कारण बंद कोरोनरी आर्टरी है, तो स्थिति के अनुसार इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ सकती है।























