भिलाई: छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन अचानक बंद किए जाने से भारी आक्रोश व्याप्त है। अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय (भिलाई) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उच्च शिक्षा विभाग पर कैबिनेट के फैसले की मनमानी और गलत व्याख्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा और सचिव डॉ. अनुराग पांडेय ने कहा कि विभाग के इस कदम से सैकड़ों रिटायर्ड शिक्षक व कर्मचारी भुखमरी और गंभीर आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़े हो गए हैं।
‘कैबिनेट ने नया प्रस्ताव खारिज किया था, पुरानी पेंशन बंद करने को नहीं कहा’
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था कि अनुदानित कॉलेजों के पेंशनरों को उनके अंतिम आहरित वेतनमान के अनुसार पेंशन और उपदान (ग्रेच्युटी) दिया जाए। मंत्रिपरिषद ने इस नए प्रस्ताव को नियमों के दायरे में न होने का हवाला देकर अमान्य किया था और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में पैरवी की बात कही थी।
संघ का तर्क है कि कैबिनेट के इस फैसले का सीधा अर्थ यही था कि अंतिम वेतनमान के आधार पर पेंशन देने की नई व्यवस्था मंजूर नहीं हुई। इसमें कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि 37 वर्षों से नियमित रूप से मिल रही पुरानी पेंशन को ही बंद कर दिया जाए। इसके विपरीत, उच्च शिक्षा विभाग ने 1 सितंबर और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर सेवानिवृत्त कर्मियों की पुरानी पेंशन रोक दी और सेवारत कर्मचारियों की भविष्य की पेंशन व ग्रेच्युटी पात्रता भी समाप्त कर दी।
37 वर्षों से मिल रही थी सुविधा, 2 महीने से नहीं हुआ भुगतान
पदाधिकारियों ने बताया कि 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के तहत कर्मियों को पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन और चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी मिलती आ रही थी। कर्मचारी केवल यह मांग कर रहे थे कि जिस वेतनमान से वे रिटायर हुए हैं, उसी के आधार पर उनकी पेंशन तय की जाए।
प्राध्यापकों का कहना है कि पेंशन कोई खैरात या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि जीवनभर की निष्ठावान सेवा के बदले मिलने वाला उनका विधिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा है। बुजुर्ग शिक्षक इलाज और रोजमर्रा के खर्च के लिए इसी पर निर्भर हैं। जुलाई और अगस्त 2026 की पेंशन पहले ही लंबित है और सितंबर से इसे पूरी तरह बंद कर देना अमानवीय है।
संघ ने सरकार के समक्ष रखीं ये प्रमुख मांगें:
-
मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या कर जारी किए गए 1 और 11 सितंबर 2026 के दोनों आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं।
-
सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को वर्षों से मिल रही पूर्ववत पेंशन अविलंब बहाल की जाए।
-
जुलाई और अगस्त 2026 सहित सभी बकाया पेंशन का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित हो।
-
वर्तमान में सेवारत कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता को पहले की तरह सुरक्षित रखा जाए।
संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से इस मामले में संज्ञान लेकर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रोकी गई पेंशन शीघ्र बहाल नहीं की गई, तो प्रभावित शिक्षक और कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने तथा अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे।























