शिक्षा डेस्क
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और शिक्षकों के सेवा मामलों को लेकर सरगर्मी चरम पर है, लेकिन दोनों राज्यों की तस्वीर बिल्कुल जुदा है। मध्य प्रदेश में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब परीक्षा केंद्रों के निर्धारण और प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ में सरकार और शिक्षा विभाग के साथ कई दौर की बैठकों के बाद भी आधिकारिक आदेश जारी न होने से शिक्षकों का सब्र टूटने लगा है।
मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोजित हो रही इस पात्रता परीक्षा के लिए लगभग डेढ़ लाख संभावित शिक्षकों के मुकाबले सिर्फ 34,200 शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। इनमें करीब 20,000 सरकारी और 14,000 निजी स्कूलों के शिक्षक शामिल हैं। आवेदन की तारीखें दो बार बढ़ाए जाने के बावजूद संख्या सीमित रहने के बाद, अब माध्यमिक शिक्षा मंडल और लोक शिक्षण संचालनालय वास्तविक आवेदकों की जिला और संभागवार सूची तैयार करने में जुटा है।
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परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करने के लिए दशहरे के बाद उच्च अधिकारियों की एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसके बाद विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। खास बात यह है कि इस परीक्षा परिणाम के जनवरी तक आने की उम्मीद है, जिस पर प्रदेश के 32 हजार से अधिक सरकारी शिक्षकों की पदोन्नति का भविष्य भी टिका हुआ है। हालांकि, दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का विरोध अभी थमा नहीं है; अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद 22 दिसंबर तक आंदोलन भले ही स्थगित कर दिया हो, लेकिन वे TET परीक्षा को पूरी तरह समाप्त करने और तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा में संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को कानून में संशोधन का प्रस्ताव भेजने की मांग पर अब भी कायम हैं।
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इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ का हाल बिल्कुल अलग है। वहां विभागीय टीईटी के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीन-तीन दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं, जिसमें वर्ष में तीन बार विभागीय टीईटी कराने का प्रस्ताव भी सामने आया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। केवल मौखिक आश्वासनों के भरोसे चल रही इस प्रक्रिया से शिक्षकों में गहरा असमंजस और आक्रोश व्याप्त है।
छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय संयोजक रविन्द्र राठौर, सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय और मंच के संचालक विकास सिंह राजपूत ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द ही पात्रता की शर्तों, समय-सारणी और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लिखित आदेश जारी नहीं किया, तो प्रदेशभर के शिक्षक सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। मंच की प्रमुख मांग है कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी तरह राहत दी जाए, साथ ही पूर्व सेवा की गणना, सेवा सुरक्षा और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार समयबद्ध और ठोस निर्णय ले।
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फिलहाल, मध्य प्रदेश में जहां प्रशासन परीक्षा की तैयारियों को अमलीजामा पहनाने में जुटा है, वहीं छत्तीसगढ़ में शिक्षक अपनी सेवा सुरक्षा और भविष्य के स्पष्ट आदेशों के लिए सरकार के अगले कदम पर पैनी नजर गड़ाए बैठे हैं।
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